हिमखबर डेस्क
क्रिकेट विश्वकप का पहला सेमीफाइनल नई पिच पर खेला जाना था, लेकिन इसे बदल दिया गया है और पुरानी पिच पर मैच हुआ, जिसमें पहले से ही दो मैच खेले जा चुकेे थे।
जानकारी के अनुसार बुधवार को वानखेड़े में खेले गए भारत-न्यूजीलैंड सेमीफाइनल में पिच को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। न्यूजीलैंड की मीडिया में इस पर खूब चर्चाएं हो रही हैं।
न्यूजीलैंड मीडिया ने कहा
न्यूजीलैंड की मीडिया कंपनी स्टफ ने लिखा है कि इंडियन क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड को आखिरी समय में बदली गई पिच पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन भारतीय टीम पिच विवाद को लेकर घिरी हुई है।
ब्रिटेन के डेली मेल और ईएसपीएन क्रिकइन्फो ने बताया कि यह पहले पिच नंबर सात पर खेला जाना था, जो कि वानखेड़े स्टेडियम की केंद्रीय पट्टी है, जो ग्रुप चरण में अप्रयुक्त सतह है। हालांकि खेल को पिच छह में बदल दिया गया, इस सतह का उपयोग दो मैचों के लिए किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की टूर्नामेंट खेलने की शर्तों के अनुसार संबंधित ग्राउंड अथॉरिटी किसी भी मैच से पहले पिच के चयन और तैयारी के लिए जिम्मेदार है। डेली मेल ने दावा किया कि आईसीसी के स्वतंत्र पिच सलाहकार एंडी एटकिंसन टूर्नामेंट पूर्व योजनाओं में बदलाव से निराश थे।
क्यों बदली गई पिच
न्यूजीलैंड के एक अखबार दि पोस्ट ने लिखा है कि पिच क्यों बदली गई, क्या ऐसा करने के लिए भारत की ओर से कोई आदेश था, इस पर आगे जांच की जानी चाहिए।
बदलाव आम बात
आईसीसी ने जोर देकर कहा है कि वानखेड़े की पिच में बदलाव से कुछ भी अप्रिय नहीं हुआ है। इतने लंबे आयोजन के अंत में नियोजित पिच रोटेशन में बदलाव आम बात है और पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है। यह बदलाव हमारे मेजबान के साथ आयोजन स्थल क्यूरेटर की सिफारिश पर किया गया था।
भारत कहीं भी हरा सकता है
उधर, इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने कहा है कि सेमीफाइनल पहले से इस्तेमाल हुई पिचों पर नहीं खेलना चाहिए। भारतीय टीम जबरदस्त है और मैं नहीं मानता कि उसे पिच को लेकर चिंताग्रस्त होना चाहिए। भारत संभवत: किसी भी पिच पर न्यूजीलैंड को हरा सकता है।

