
समय पर आंखों के आपरेशन न होने से मरीजों की बढ़ रही दिक्कतें, प्रशासन बेखबर
कांगड़ा – राजीव जसबाल
डा. राजेंद्र प्रसाद आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में आंखों के आपरेशन करने की मशीनें खराब हो गई है।
टांडा अस्पताल में नेत्र रोग विभाग में लेजर मशीन तथा ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी, ओसीटी ऑपरेशन करने वाली मशीनें खराब हो गई है।
जबकि लेजर मशीन करीब एक साल से खराब चल रही है उसे न तो टांडा अस्पताल ठीक करवा पाया है और न ही नई मशीन लगाई गई है।
लगभग 15 लाख की लेजर मशीन अस्पताल परिसर में धूल फांक रही हैं। लेजर मशीन के बिना नेत्र के ऑपरेशन के समय मोतियाबिंद की झिल्ली को नहीं काटा जा सकता है।
वहीं 40 लाख की ओसीटी मशीन एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है, जिसके चलते दूरदराज से आने वाले मरीजों को हर दिन बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कई मरीजों को आंखों में बहुत ज्यादा परेशानी के कारण निजी अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
लगभग एक महीने पहले आंखों की ओसीटी मशीन खराब हो गई थी जिसे अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। टांडा अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डा. एस के शर्मा ने फिर भी बिना मशीनों के व्यवस्था को जैसे तैसे चलाया हुआ है।
डा. एसके शर्मा ने बताया कि जिस दिन ओसीटी मशीन खराब हुई थी हमने उस दिन ही संबंधित मशीन की नेक्सजेन कंपनी और इंजीनियर को सूचित कर दिया था और उन्हें इस मशीन को जल्द ठीक करने को कह दिया था लेकिन अभी तक मशीन को ठीक नहीं किया जा सका है और लेजर मशीन लगभग एक साल से खराब है।
मरीजों का कहना है कि मशीनों के खराब होने की वजह से हमें दूसरे प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन करवाने पड़ रहे हैं आयुष्मान व हिमकॉर्ड बने होने के बावजूद नकद पैसे देकर उपचार करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल व आयुष्मान व हिमकॉर्ड का हमें कोई भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।
