
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) शिमला लोकल डिपो परिचालकों (कंडक्टरों) की कमी से जूझ रहा है। लोकल डिपो में करीब 25 परिचालकों की कमी है। इसके कारण निगम के लोकल रूट प्रभावित हो रहे हैं।
इससे मौजूदा स्टाफ को भी पर्याप्त छुट्टियां नहीं मिल पा रही हैं। शिमला में सबसे ज्यादा बसें चलती हैं। रोजाना लोकल रूटों पर 110 परिचालकों की ड्यूटी लगती है। इनमें रोजाना 25 कंडक्टरों की कमी चल रही है, जिससे रूटों पर बसें नहीं भेजी जा रही हैं।
कुछ माह में हुए 40 परिचालकों के तबादले
कुछ माह पहले डिपो से 40 परिचालकों के तबादले हुए थे। इसमें 40 कंडक्टर वापस डिपो आने थे लेकिन 15 ही कंडक्टर डिपो में वापस आए हैं। ऐसे में 25 कंडक्टरों की कमी बरकरार है।
ऐसे में शहर में स्कूल खुलने के बाद दिक्कत और बढ़ जाएगी। कंडक्टरों की कमी के कारण सुबह से शाम तक पुराना बस स्टैंड से विभिन्न रूटों पर चलने वाले आठ से 10 रूट प्रभावित हो रहे हैं।
ये रूट हो रहे प्रभावित
चंडीगढ़ के दो रूट, शिलगांव, नाल, पपरोल-शोघी, नालहट्टी, साधपुल सहित अन्य रूट प्रभावित हो रहे हैं। इनमें कई रूटों पर दो से तीन बसें भेजी जाती हैं, लेकिन कंडक्टरों की कमी के चलते एक ही बस भेजी जा रही है। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है। परिवहन निगम लोकल कंडक्टर यूनियन ने सरकार से पदों को भरने की मांग की है।
छुट्टी के लिए परिचालक हो रहे परेशान
यूनियन के अध्यक्ष प्रीत महेंद्र ने कहा कि कंडक्टरों की कमी के चलते अन्य परिचालकों को भी परेशान होना पड़ रहा है। परिचालकों को समय से छुट्टी नहीं मिल पा रही है।
कई परिचालकों को इमरजेंसी है तो कइयों के घर में शादी है, लेकिन छुट्टी के लिए उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। यदि लोकल डिपो से ट्रांसफर किए गए कंडक्टरों की संख्या को पूरा कर दिया जाए तो यह कमी पूरी हो जाएगी।
