Home खेल-जगत भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर का जिम्मेदार कौन?

भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर का जिम्मेदार कौन?

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नवीन चैाहान

बीसीसीआई विश्व का सबसे मजबूत क्रिकेट बोर्ड माना नहीं जाता है बल्कि विश्व का सबसे मजबूत बोर्ड है। भारतीय टीम ने प्रथम बार 1983 में महान आलराउंडर कपिल देव की अगुवाई में अप्रत्याषित रूप से उस समय की विश्व की श्रेष्ठ टीम वेस्टइंडीज को हराकर जीता तो भारत में क्रिकेट खेल की लोकप्रियता एक दम तेजी से बढ़ी।

भारतीय टीम ने जल्दी ही अपनी पहचान विश्व की मजबूत टीम के रूप में बनाने ली। 1983 की विश्व कप सफलता के बाद 1985 में भी भारतीय टीम ने बेसन एडं हेजइज विश्व चैंपियन बन ये साबित किया कि 1983 की विश्व कप विजय महज एक तुक्का नहीं था।

हालांकि इसके बाद भारतीय टीम को विश्व विजेता बनने में 27 लग गये और भारतीय टीम ने विश्व कप 2011 में महेन्द्र सिंह धोनी की अगुवाई में जीता हालांकि धोनी की अगुवाई में 2007 टी-20 विश्व कप इस बीच भारतीय टीम ने जीता। किन्तु 2011 के बाद भारतीय टीम विश्व कप हो या टी-20 विश्व कप हमेशा बिखरती नजर आई।

बीसीसीआई ने 2008 विश्व की सबसे बड़ी लीग के आयोजन की शुरूआत इस उम्मीद की कि भारतीय क्रिकेट शीर्ष पर रहे। परन्तु कहीं ना कहीं ये लीग भारतीय क्रिकेट के पतन का कारण भी बनती जा रही है। बेशुमार पैसा लोगों को इस खेल के प्रति आकर्षित करने लगा, नेता, अभिनेता या फिर पत्रकार सब पैसे की वजह से इस खेल में इंट्री मारने लगे।

देश से ज्यादा पैसों की अहमियत नेता, अभिनेता और पत्रकारों को होने लगी। हालत ये रही ये सारे नेता, अभिनेता और पत्रकार अपने जलवा स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन में भी दिखाने लगे क्योंकि आईपीएल में एंट्री होनी तो थी स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा।

हालत ये रही कभी कभी ये नेता, अभिनेता और पत्रकार सोशल मीडिया पर अपने-अपने प्लेयर्स को खिलाने के लिए भिड़ते भी नजर आए, इन सबका बस एक ही मकसद था प्लेयर्स को खेलना आए या ना आए बस अपने प्लेयर को टीम में कैसे भी गलत भुमिका बनाकर लाना। हालत ऐसे होने लगे हैं कि बीसीसीआई अंडर 19 में प्लेयर्स 2 से 6 साल की एज कम कर खेलते नजर आए और टैलंइड और रीयल एज से खेलने वाले प्लेयर्स का स्टेट टीम में आना दुर्लभ होने लगा।

भारतीय क्रिकेट की हालात को अगर बी.सी.सी. आई को सुधारना है भारतीय टीम के गिरते स्तर को उपर उठाना है तो स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन्स पर तुंरत निगरानी करने की जरूरत है।

अगर स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन टैलंइड प्लेयर्स को निचले स्तर पर ही खत्म कर देगा इन नेताओं, अभिनेताओं और पत्रकारों के दबाव के कारण तो कहीं ना कहीं भारतीय क्रिकेट हमेशा निचले स्तर पर ही दिखाई देगा। खेलों में ऐसे प्लेयर्स को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए तो सचमुच टेलेन्टइड हो, नेता अभिनेता और पत्रकारों को सलेक्शन से दूर रखना होगा।

सुधार के लिए बी. सी. सी. आई को कुछ ऐसे नियम लाने होगें, जिससे स्टेट क्रिकेट के लिए जरूरी हो जाए कि अपनी टीमों में टेलेन्टिड प्लेयर्स को जगह देना आवश्यक हो जाए। सुधार के लिए बी.सी.सी.आई एक नियम ये भी ला सकती है कि मैच फीस सिर्फ उन प्लेयर्स को दी जाए जो टीमें नाकआउट में प्रवेश करेंगी।

बात देश की गरिमा की है। फैसले लेना बी.सी.सी.आई के तमाम उन आफसियल्स का है जो बी. सी. सी. आई उच्य सीटों पर विराजमान है, सोचना होगा कि देश का नाम बड़ा है या फिर पैसा?