
कर्मियों के कारण बताओ नोटिस के जवाब से चुनाव आयोग असंतुष्ट, चुनाव आयोग ने संबंधित विभागों को कार्रवाई करने के लिए कहा
व्यूरो रिपोर्ट
चुनाव में ओल्ड पेंशन से संबंधित एक फेसबुक पोस्ट पर शिक्षक महासंघ के एक पदाधिकारी पर चार्जशीट के बाद अब एनपीएस के पदाधिकारियों व कर्मचारियों पर चार्जशीट की कार्रवाई हो सकती हैं।
सोशल मीडिया पर वोट फॉर ओपीएस की मुहिम चलाने वाले छह सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सर्विस नियमों के तहत कार्यवाही के आदेश चुनाव आयोग ने दिए हैं। इनके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया गया है। अब संबंधित विभाग इन्हें चार्जशीट करेंगे।
विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट भी मांगी गई है। यह चार्जशीट मेजर पेनल्टी की होगी या माइनर की, यह विभागों को देखना है। गौरतलब है कि भाजपा की ओर से इन पदाधिकारियों व कर्मचारियों की चुनाव आयोग को शिकायत की गई थी।
चुनाव आयोग ने संबंधित विभागों को इन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा था, लेकिन कुछ शिकायतों पर चुनाव आयेाग को अभी तक जवाब नहीं आया हैं। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी संघ के छह कर्मचारियों की शिकायत भाजपा ने चुनाव आयोग से की थी।
इन सभी कर्मचारियों पर आदर्श आचार संहिता के दौरान सोशल मीडिया व ऑनलाइन न्यूज चैनल से कांग्रेस पार्टी के पक्ष में प्रचार करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने चुनाव आयोग से एनपीएस संघ के दोनों कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
भाजपा चुनाव प्रकोष्ठ के संयोजक सुरेंद्र एस घोनक्रोक्टा ने शिकायत में कहा था कि आदर्श आचार संहिता के दौरान कर्मचारी सोशल मीडिया पर कांग्रेस पार्टी पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी शिक्षा विभाग में तैनात हैं, तो कुछ कर्मचारी वन विभाग में और स्वास्थ्य विभाग के हैं।
इन पर आरोप लगाया गया था कि इनके द्वारा सोशल मीडिया व ऑनलाइन न्यूज चैनल पर कांग्रेस के पक्ष में प्रचार किया जा रहा है। चुनाव आयोग को भेजी गई शिकायत में यह भी लिखा गया था कि एनपीएस संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पर एक अकाउंट बनाया गया है।
इस पर एनपीएस कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस पार्टी के पक्ष में पोस्ट व कमेंट किए जाते हैं। शिकायत में लिखा गया था कि सोशल मीडिया पर एनपीएस संघ के एक प्रवक्ता की फोटो के साथ एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें वह कांग्रेस पार्टी को वोट देने की अपील कर रहे हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग से मांग उठाई है कि इन सभी कर्मचारियों ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाए।
