
शाहपुर- नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार शास्त्री अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नही दिख रही है,यही कारण है कि बीते 4वर्षों में सरकार शास्त्री अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया को अभी तक पूरा करने में असफल रही है।
गौरतलब है कि शास्त्री अध्यापकों के जो पद 2018 के बजट में स्वीकृत किये गए,सरकार ने उनका कमीशन चयनबोर्ड के माध्यम से दिसम्बर 2020 में लिया,अब बर्तमान समय में शास्त्री अध्यापकों के पदों के लिए जिन अभ्यर्थियों को मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए बुलाया गया था,उसको भी पूरा हुए 3 महीने बीत चुके हैं।
अन्य विषयों जैसे TGT मेडिकल,TGT नॉन मेडिकल ,भाषा अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम भी निकाला जा चुका है,लेकिन अभी तक शास्त्री भर्ती का अंतिम परिणाम निकालने में सरकार और अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड दोनों असफल रहे हैं। पिछले 4वर्षों से रोजगार की आस लगाए बैठे, बेरोजगार शास्त्री अभ्यर्थी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जहां एक तरफ संस्कृत को राज्य की दूसरी भाषा के रूप में सरकार ने मान्यता दी है,वहीं दूसरी तरफ शास्त्री अध्यापको का अंतिम परिणाम सबसे अंत मे निकालने की सरकार की मंशा संस्कृत भाषा और संस्कृत प्रेमियों के लिए उचित नही है।शास्त्री अभ्यर्थियों में अमित, नवजोत ,साहिल,अजय, मुकेश, संदीप , अवनीश राणा, आशीष कुमार, लता कुमारी,उषा देवी,मीना शर्मा, ज्योति ,अरुण कुमार, जगजीत ,मनोज शर्मा ,ने सरकार से और चयन बोर्ड से यह आ जल्दी शास्त्री भर्ती का अंतिम परिणाम निकालने की कृपा करें।ताकि बेरोजगारों का मानसिक तनाव खत्म हो सके।
