23 की उम्र में पहनी IPS की वर्दी…सोलन की कमान संभाल रहा तमिलनाडु का बेटा “अभिषेक शेखर ”

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हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश में इन दिनों एक युवा आईपीएस (IPS) अधिकारी की चर्चा जोरों पर है, जिसने बेहद कम उम्र में अपनी मेहनत और लगन से बड़ी पहचान बनाई है।

अभिषेक शेखर, जो मूल रूप से वेल्लूर (तमिलनाडू) के निवासी हैं, आज हिमाचल की कानून व्यवस्था संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

वर्ष 2019 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिषेक शेखर ने महज 23 वर्ष की आयु में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि उन्हें देश के सबसे युवा सफल उम्मीदवारों में शामिल करती है।

हाल ही में उन्हें सोलन जिले का कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे शिमला में एसपी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर तैनात थे और तीन सप्ताह के लिए उन्हें सोलन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इंजीनियरिंग से खाकी तक का सफर….

अभिषेक शेखर का शैक्षणिक सफर भी उतना ही दिलचस्प है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक और योग में बीएससी की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दौरान वे छात्र संघ की गतिविधियों में सक्रिय रहे, जहां से उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना मजबूत हुआ।

असफलता से सफलता तक….

UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में 409वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया।

सेवा और कार्यशैली….

ट्रेनिंग के बाद उन्होंने कांगड़ा जिले के इंदौरा और धर्मशाला में अपना प्रोबेशन पूरा किया। इसके बाद शिमला में बतौर एएसपी उनकी पहली स्वतंत्र तैनाती हुई। वे करीब दो वर्षों तक राज्यपाल के एडीसी भी रहे।

जुलाई 2024 में उन्हें पहली बार किन्नौर जिले में पुलिस कप्तान के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने करीब 16 महीनों तक सेवाएं दीं।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नशा तस्करी और ड्रंक एंड ड्राइविंग के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई की। इसके बाद उन्हें शिमला में एसपी लॉ एंड ऑर्डर बनाया गया और वर्तमान में वे सोलन जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

अभिषेक शेखर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। एक साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में स्थान पाना, हर युवा के लिए प्रेरणा है।

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