हिमाचल परिवहन विभाग की बड़ी पहल! खुद बिजली पैदा कर इलेक्ट्रिक वाहनों को करेगा चार्ज, आम जनता को भी मिलेगी सुविधा

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हिमखबर डेस्क

देवभूमि हिमाचल को ‘हरित राज्य’ बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विभाग ने शिमला स्थित अपने निदेशालय में सोलर पैनल आधारित इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। अब विभाग के इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए बिजली बिल की चिंता नहीं रहेगी, क्योंकि विभाग खुद अपनी बिजली तैयार कर रहा है।

पायलट प्रोजेक्ट: 15 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट

परिवहन निदेशालय ने इस योजना के तहत 15 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए हैं। यह वर्तमान में एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसे सफलता मिलने पर भविष्य में और विस्तारित किया जाएगा। इसके साथ ही 70 किलोवाट क्षमता का एक आधुनिक इनवर्टर लगाया गया है।

सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली सीधे चार्जर को सप्लाई होती है। दिन में अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाता है, जिससे रात के समय भी वाहनों की चार्जिंग निर्बाध रूप से जारी रहती है। यहां लगे फास्ट चार्जर मात्र 20 से 30 मिनट में गाड़ी की बैटरी चार्ज करने में सक्षम हैं।

पर्यटकों और आम जनता को बड़ी राहत

विभाग ने इस चार्जिंग स्टेशन के दरवाजे अब आम जनता और बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी खोल दिए हैं। आम लोग 16 रुपये प्रति यूनिट की दर से अपने वाहन चार्ज करवा सकेंगे। इससे न केवल विभाग को कमाई होगी, बल्कि ई-वाहन लेकर आने वाले पर्यटकों को स्टेशन ढूंढने की मशक्कत नहीं करनी होगी।

ईंधन पर 80 लाख की बचत, अब बिजली बिल भी शून्य

परिवहन विभाग हिमाचल का ऐसा पहला विभाग है जिसका पूरा बेड़ा (करीब 18 वाहन) इलेक्ट्रिक हो चुका है। विभाग ने जब पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को हटाया था, तब करीब 80 लाख रुपये के ईंधन खर्च की बचत हुई थी। अब सोलर चार्जिंग की शुरुआत के बाद कमर्शियल बिजली की दरों (6.40 पैसे प्रति यूनिट) से भी छुटकारा मिल गया है, जिससे परिचालन लागत लगभग शून्य हो गई है।

बता दें कि प्रदेश सरकार ने 31 मार्च 2026 तक हिमाचल को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। साल 2017 में राज्य में मात्र 15 ई-वाहन थे, जो अब बढ़कर 5,300 के पार हो गए हैं। प्रदेश में 132 चार्जिंग स्टेशन काम कर रहे हैं और 450 नए स्टेशन बनाने की तैयारी है। वहीं, अप्रैल से परिवहन निगम के बेड़े में 297 नई ई-बसें शामिल की जा रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण न फैलने पर पर्यावरण का संरक्षण होता है।

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