हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के कई निजी स्कूलों सहित सरकारी स्कूलों में समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी न करने को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग सख्त हो गया है।
राज्य के कई स्कूलों में इन दिनों अभिभावक अपने बच्चों को एक स्कूल से दूसरे स्कूलों में दाखिला दिलवा रहे हैं, वहीं राज्य में नए 151 सीबीएसई स्कूलों में भी इन दिनों एडमीशन का दौर जारी है।
ऐसे में कई निजी सहित सरकारी स्कूल बच्चों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट या तो जानबूझ कर रोक रहे हंै या फिर इसे जारी करने में देरी कर रहे हैं, जिसके कई मामले शिक्षा विभाग के पास पहुंचे हैं।
ऐसे में विभाग ने इस मामले पर सख्ती करते हुए सभी निजी और सरकारी स्कूलों को सख्त हिदायतें जारी की हैं। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के निजी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विभाग की ओर से मांगी गई सभी सूचनाएं, रिपोर्ट और रिटर्न समय पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
साथ ही किसी भी छात्र को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने में अनावश्यक देरी या इनकार करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (रेगुलेशन) एक्ट, 1997 की धारा 14 और 15 के तहत हर निजी शिक्षण संस्थान को समय-समय पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा मांगी गई जानकारी, आंकड़े और रिपोर्ट उपलब्ध करानी होती है।
आवेदन के बाद भी देरी कर रहे स्कूल
शिक्षा विभाग को मिली शिकायत में सामने आया है कि कई मामलों में अभिभावकों द्वारा आवेदन करने के बावजूद निजी स्कूल विद्यार्थियों का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने में अनावश्यक कारणों से देरी कर रहे हैं या मना कर रहे हैं। विभाग ने इसे आरटीई एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ बताया है।
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के निजी स्कूलों के प्रमुखों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के लिए निर्देशित करें।
अभिभावक के आवेदन करने पर छात्र का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट तुरंत जारी करना अनिवार्य होगा, ताकि बच्चे को अपनी पसंद के स्कूल में प्रवेश लेने का अधिकार मिल सके।

