स्टाफ के अभाव में स्वास्थ्य उप केंद्रों पर लटके ताले, मरीज भगवान के भरोसे

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स्टाफ के अभाव में स्थिति बदतर बन चुकी है। विडंबना यह भी है कि कोरोना काल के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों की किसी ने सुध नहीं ली। चिंतपूर्णी के बधमाणा गांव में पिछले लंबे समय स्वास्थ्य उप केंद्र बंद पड़ा है।

ऊना – अमित शर्मा

विधानसभा क्षेत्र चिंतपूर्णी का धार क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से काफी लंबे- चौड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। बावजूद इसके क्षेत्र में परिवहन सेवाओं की सीमित उपलब्धता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधा घर-द्वार पर देने के उद्देश्य से सरकार ने पंचायत मुख्यालयों पर स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले थे।

मंशा थी कि इससे केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से ग्रामीण जनता के हित में चलाए गए कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों का भी लाभ लोगों को मिलेगा। लेकिन अब हालत यह है कि इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से अधिकतर पर ताला लटका हुआ है। स्टाफ के अभाव में स्थिति बदतर बन चुकी है।

मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते हाल-बेहाल

विडंबना यह भी है कि कोरोना काल के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों की किसी ने सुध नहीं ली। धार क्षेत्र की पंचायतों में खुले इन स्वास्थ्य केंद्रों का पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते हाल-बेहाल हो चुका है।

बेशक यह समस्या पिछले कई साल से बनी हुई है लेकिन हैरानी है कि अभी तक इन केंद्रों में स्टाफ उपलब्ध नहीं करवाया गया है।

घंगरेट, थनीकपुरा, चाहबाग व सिद्ध चलेहड़ में आधे स्टाफ से काम चलाया जा रहा है, लेकिन अन्य केंद्रों पर स्टाफ ही नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिलें, यह बड़ा सवाल है।

जाना पड़ रहा निजी चिकित्सकों के पास

पीएचसी धर्मसाल महंता के अधीन खरोह, बेहड़-भटेहड़, गिंडपुर मलौण और बधमाणा के उपकेंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत आने पर टैक्सी देकर चंबी या चिंतपूर्णी अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है या फिर निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों में सुरेश कुमार, दलजीत सिंह, गौरव, रंजीत, मोनिका, सीमा कौल और हरनाम सिंह ने कहा कि जनहित में सरकार को इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्थायी स्टाफ की नियुक्ति करनी चाहिए।

तीन स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों की हालत भी खस्ता

क्षेत्र के तीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों के भवनों की हालत भी अत्यंत जर्जर हो चुकी है। बधमाणा, गिंडपुर मलौण और थनीकपुरा के भवन बेहद खस्ताहाल हैं। मरम्मत व जीर्णोद्धार न होने के कारण ये केंद्र अब किसी खंडहर जैसे नजर आते हैं। इन तीनों केंद्रों में नए भवनों की आवश्यकता है लेकिन अभी तक बजट का प्रविधान नहीं हो पाया है।

चल रही स्टाफ की कमी

खंड चिकित्सा अधिकारी डा. राजीव गर्ग ने बताया कि चिंतपूर्णी क्षेत्र के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्टाफ की कमी चल रही है। क्षेत्र के सात में से पांच में स्टाफ न होने के कारण केंद्र बंद चल रहे हैं। स्टाफ की कमी के बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को भी अवगत करवा दिया है।

विधायक सुदर्शन सिंह बबलू के बोल

विधायक सुदर्शन सिंह बबलू का कहना है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया था। क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वालों ने लंबे समय से बंद पड़े स्वास्थ्य उपकेंद्रों को लेकर संवेदनहीन रवैया अपनाए रखा। निश्चित तौर पर अब स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।

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