
हर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को फंड से दिए थे 10 हजार।
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल में सडक़ हादसों के प्रति स्कूली बच्चों को जागरूक करने के लिए स्कूलों को दिया गया पैसा भी खर्च नहीं हो पाया है।
परिवहन विभाग ने रोड सेफ्टी के फंड से हर सीनियर सेकेंडरी स्कूल को 10 हजार और डिग्री कालेजों को 25 हजार रुपए जारी किए थे। अब 31 मार्च से पहले इस राशि को खर्च करके यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा होने हैं।
जब यह तारीख नजदीक आई, तो बहुत से स्कूलों ने इस पैसे को सरेंडर करना शुरू कर दिया। कई स्कूलों में इस राशि का पूरा इस्तेमाल ही नहीं हो पाया।
इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशक ने सभी स्कूलों के प्रिंसीपल, कालेजों के प्रिंसीपल और सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर को लिखित आदेश दिए हैं कि कोई भी स्कूल या कालेज यह पैसा वापस नहीं करेगा और इसको पूरा इस्तेमाल करेगा।
स्कूलों से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भी इसके बाद मांगा गया है। परिवहन विभाग की ओर से जब इस पैसे का आबंटन किया गया था, तब इसके साथ एसओपी भी दी गई थी कि इसे कैसे इस्तेमाल करना है और कैसे रिकार्ड मेंटेन करना है।
इस फंड को इस्तेमाल करने के लिए स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब बने हैं, जिसमें एक लेक्चरर को को-ऑर्डिनेटर भी लगाया गया है।
इसके बावजूद सडक़ हादसों के प्रति जागरूकता ट्रैफिक सिग्नल की जानकारी हादसों के कारणों पर डिबेट इत्यादि आयोजन भी बहुत से स्कूल नहीं कर पाए।
इस स्थिति से परिवहन विभाग के उस फैसले पर भी सवाल उठते हैं, जिसके तहत खुद जागरूकता कार्यक्रम करने के बजाय पैसा ही शिक्षण संस्थानों में बांट दिया गया।
अब 31 मार्च तक आने वाली डिटेल के बाद परिवहन विभाग भी इस आबंटन को लेकर दोबारा से पुनर्विचार करेगा।
