
शिमला – नितिश पठानियां
इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) शिमला में “गुरु के लंगर’ का अंधेरा अब छंट गया है। पूर्व सरकार ने लंगर भवन का बिजली व पानी कनेक्शन काट दिया था।
हालांकि, यह अंधेरा आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था का सेवाभाव नहीं तोड़ पाया और 16 माह तक अपने संसाधनों से ही लंगर लगाया। संस्था के समन्वयक सरबजीत सिंह बाबी सुबह सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविदंर सिंह सुक्खू से मिलने पहुंचे।
आठ साल से लगा रहे निश्शुल्क लंगर
इससे कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री ने बिजली बोर्ड व शिमला जल प्रबंधन निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि संस्था का बिजली-पानी दोबारा बहाल करें। शाम चार बजे तक इसकी संयुक्त रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि, मुख्यमंत्री का निर्देश होते ही दोनों विभाग हरकत में आए और घंटे के भीतर ही बिजली-पानी का कनेक्शन बहाल कर दिया।
सरबजीत सिंह बाबी आठ वर्ष से निश्शुल्क लंगर लगा रहे हैं। आइजीएमसी के अलावा कमला नेहरू अस्पताल शिमला में भी उनकी संस्था लंगर लगाती है। इसके लिए उन्होंने पूरे शिमला शहर में रोटी बैंक भी शुरू किया है। लोगों के घरों से रोटियां आती हैं, जिन्हें लंगर में बांटा जाता है।
वीरभद्र सिंह सहित कई नेता आते थे लंगर में
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह सहित कई नेता आइजीएमसी में आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था के लंगर में आते थे। प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से आइजीएमसी आने वाले मरीज व उनके तीमारदार भूखे न सोएं इसके लिए संस्था ने यह पहल शुरू की थी। इसके तहत सुबह नाश्ता व शाम को निश्शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है।
यह है पूरा मामला
आइजीएमसी में पहले आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था लंगर लगाती थी। 2017 में नोफेल नाम की संस्था ने भी यहां पर लंगर सेवा शुरू कर दी। आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था के सरबजीत सिंह कैंसर अस्पताल के सराय भवन में यह लंगर लगाते थे। पूर्व सरकार के कार्यकाल में आइजीएमसी प्रशासन ने टेंडर निकाल कर नोफेल संस्था को यहां लंगर लगाने का जिम्मा सौंपा था।
इसके बाद उस जगह का बिजली-पानी कनेक्शन काट दिया है, जहां आलमाइटी संस्था लंगर लगा रही थी। 2017 में ही आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था की ओर से कैंसर मरीजों के लिए एक रेन बसेरा बनाने का काम शुरू हुआ था। यह 2019 में बनकर तैयार हुआ। आइजीएमसी प्रशासन ने रेन बसेरा नोफेल संस्था को दे दिया था।
रिज पर दिया था धरना
सरबजीत सिंह बाबी ने लंगर भवन में बिजली-पानी का कनेक्शन काटने के विरोध में पहले आइजीएमसी में प्रधानाचार्य कार्यालय के बाहर धरना दिया था। उसके बाद रिज मैदान पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे थे। शिमला की कई संस्थाएं व लोग उनके समर्थन में आए थे।
