सीएम के स्कूल में नन्हे-मुन्नों का बचपन सेफ नहीं, प्राइमरी पाठशाला गिरने के कगार पर

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मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की समस्या से अवगत करवाने के बाद भी आज तक नहीं गिराया भवन, आंगनबाड़ी केंद्र भी चल रहा साथ, 60 साल पुराना स्कूल अनदेखी का शिकार, बरसात के चलते हर पल हादसे का डर, एसएमसी ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन।

मंडी – नरेश कुमार 

प्रदेश सरकार भले ही सभी को अच्छी शिक्षा देने के लाख दावे करती हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। प्रदेश में कुछ सरकारी विद्यालयों की हालत दिनों-दिन खराब होती जा रही है।

बात अगर यहां की व्यवस्थाओं की करें तो वो भी राम भरोसे ही हैं। कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं स्कूलों की हालत इतनी जर्जर है कि वे कभी भी गिर सकते हैं।

ऐसा ही एक स्कूल मुख्यमंत्री की विधानसभा क्षेत्र सराज तहत पडऩे वाली ग्राम पंचायत खवलेच का राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्कूल है। करीब 60 वर्ष पुराने स्लेटपोश प्राइमरी स्कूल के दो कमरे पूरी तरी जर्जर हो चुके है।

स्कूल के कमरों की हालत इस कदर है कि अब गिरा, की तब गिरा। स्कूल की छत से स्लेट भी गिर गए हैं। वहीं, कमरों की दीवारें पूरी तरह खराब हो गई है, जो बरसात में कभी भी गिर सकती है।

प्राथमिक पाठशाला खवलेच की एसएमसी कमेटी ने जिला उपायुक्त अरिंदम चौधरी को पाठशाला की हालत सुधारने के लिए ज्ञापन सौंपा है।

उन्होंने बताया कि दुर्गम क्षेत्र में स्थित प्राइमरी स्कूल में करीब 50 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। स्कूल की पांच कक्षाएं मात्र दो कमरों में ही चल रही है। इतना ही नहीं , स्कूल भवन के साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी है, जहां नन्हें बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचते है।

मुख्यमंत्री को भी बताई है समस्या

स्कूल की खस्ताहालत को लेकर मुख्यमंत्री को भी कई बार अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

स्कूल के खस्ताहाल कमरों को जल्द गिराकर, उसकी जगह पक्के नए कमरों का निर्माण किया जाए, ताकि बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।

इस बारे में उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी से आश्वासन दिया है कि स्कूल कमेटी की समस्या को प्राथमिकता से हल किया जाएगा।

लकड़ी के पोल पर टिका स्कूल का बरामदा

राजकीय प्राथमिक पाठशाला खवलेच के एसएमसी कमेटी के प्रधान चंद्रमणि ने बताया कि प्राइमरी स्कूल के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके है।

अगर समय पर स्कूल के भवनों को नहीं गिराया गया, तो बड़ी अनहोनी हो सकती है। क्योंकि स्कूल कमरों को देखकर बच्चे भी कतराते है। क्योंकि भवन की छत स्लेटनुमा और बरामदा पोल पर टिका हैं।

इससे पता चलता है कि वर्षों पुराने स्कूल की हालत किस कदर होगी।

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