सतलुज में फंसे मासूमों को बचाने NTPC कोलडैम ने रोका पावर प्लांट,करोड़ों का झेला घाटा

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बिलासपुर – सुभाष चंदेल

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के खंगड़ गांव में बीती शाम एक दुर्लभ और मार्मिक घटना घटी। इसने यह साबित कर दिया कि मासूम बच्चों के अनमोल जीवन से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है। बुधवार शाम सतलुज नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तीन बच्चों में से दो नदी के बीच बने टापू पर फंस गए।

हालात बेहद नाजुक थे। लेकिन जो हुआ, वो शायद देश के किसी भी बड़े पावर प्रोजेक्ट के इतिहास में बिरले ही देखा गया हो। बिजली उत्पादन को रोककर दो मासूम जिंदगियों को बचाया गया। त्वरित कार्रवाई में मामूली सी देर हो जाती तो बच्चों की जान भी जा सकती थी।

घटना शाम करीब 5 बजे की है। गांव के तीन बच्चे कृष चंदेल पुत्र मनीष चंदेल, अनुज पुत्र वीरेंद्र और एक लड़की नदी किनारे रेत के मैदान में खेल रहे थे। इसी दौरान जलस्तर अचानक बढ़ा। घबराए कृष और अनुज किसी तरह पास के टापू पर चढ़ गए, जबकि तीसरी बच्ची किनारे तक पहुंचने में सफल रही।

बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पंचायत की वार्ड सदस्य अंजना कुमारी ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए एनटीपीसी के हेड ऑफ प्रोजेक्ट से संपर्क किया। एनटीपीसी प्रबंधन ने बिना समय गंवाए जलग्रहण गेट बंद कर दिए। परिणामस्वरूप जलस्तर धीरे-धीरे घटा।

जैसे ही बहाव कम हुआ, गांव के राजेंद्र कुमार ने रस्सियों की मदद से बहते पानी के बीच जान जोखिम में डालकर टापू तक पहुंच कर साहसिक कार्य किया और दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चे लगभग दो घंटे तक पानी से घिरे टापू पर फंसे रहे।

इस मानवीय कदम की एनटीपीसी को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। पावर प्लांट को बंद करने से करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ और बिजली की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। लेकिन कंपनी ने यह साबित कर दिया कि उसके लिए मानव जीवन सर्वोपरि है।

ग्रामीणों ने एनटीपीसी की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पानी का बहाव न रोका गया होता, तो बच्चों को बचा पाना असंभव था। वहीं राजेंद्र कुमार के साहस और मानवता को भी लोगों ने सलाम किया।

एनटीपीसी कोलडैम प्रबंधन के बोल

उधर, एनटीपीसी कोलडैम प्रबंधन ने बताया कि जब तक बच्चों को रेस्क्यू नहीं किया गया तब तक एनटीपीसी ने जलविद्युत संयंत्र का गेट बंद रखा, जिससे बिजली उत्पादन बंद रहा। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा और बिजली कटौती की नौबत आ गई।

इस दौरान एनटीपीसी को करोड़ों रुपये की पेनल्टी और उत्पादन में नुकसान का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, कंपनी ने मानवता को प्राथमिकता दी और आर्थिक हानि की परवाह न करते हुए समय पर कदम उठाया। उन्होंने आम जनमानस से सावधानी बरतने की अपील भी की है।

उनका यह भी कहना था कि एनटीपीसी अपने निर्धारित टाइम टेबल के अनुसार ही संचालन करता है, इसलिए जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना नहीं होती। बहरहाल, यह घटना न सिर्फ एक संकट से उबरने की मिसाल है, बल्कि देश भर के औद्योगिक प्रबंधन और प्रशासन के लिए भी एक प्रेरणादायक सबक है। यानी,जब बात मानव जीवन की हो, तो हर मूल्य छोटा पड़ जाता है।

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