
हिमखबर – डेस्क
मैं पंथ से विपंथ न हो जाऊं, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं भक्त से अभक्त न बन जाऊं, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं पुण्य से पाप की तरफ न बढ़ जाऊं, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं न्याय से अन्याय न करने लग पड़ूँ, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं जीत कर भी हार न जाऊं, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं हंसता हुआ कभी रो न पडूँ, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मैं इंसान से हैवान न बन जाऊं, मुझे संभाल लेना मेरे ईश्वर।
मौलिकता प्रमाण पत्र
मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।
राजीव डोगरा, (भाषा अध्यापक), गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233, rajivdogra1@gmail.com
