शाहतलाई -झभोला में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का स्थानीय लोगों ने किया कड़ा विरोध

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बिलासपुर के शाहतलाई -झभोला में प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का स्थानीय ग्राम पंचायत के लोगों एवं समीपवर्ती रहने वाले ग्रामीण लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया।  क्योंकि जहां पर यह बनना प्रस्तावित है उसी के समीप प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के प्रतीक घराट एवं पनचक्की हैं उसके समीप प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने से उस के अस्तित्व पर भी मंडराए संकट के बादल। ग्रामीणों ने जताया समीप लगते प्राकृतिक जल स्त्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा है।

 

बिलासपुर, सुभाष चंदेल

बिलासपुर के शाहतलाई में प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति के प्रतीक घराट एवं पनचक्की पर उसके समीप प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने से संकट के बादल मंडराना शुरू हो गए हैं। ग्रामीणों ने समीप लगते प्राकृतिक जल स्त्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा जताया है। ग्रामीणों ने घटना स्थल पर एकत्रित होकर विरोधस्वरूप धरना-प्रदर्शन कर नारेबाजी की। हम दर्शकों को बताना चाहेंगे कि ये आखिर मामला क्या है-

पिछली चार पीडियों से हमारी प्राचीन संस्कृति की धरोहर घराट जिसे पनचक्की भी कहा जाता है इस परिवार ने इसे संजोए के रखा है।

लेकिन यहां समीप में सीवरेज का सैप्टिक टैंक बनाए जाने के कारण इस प्राचीन संस्कृति की धरोहर पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

हालांकि इस परिवार का कहना है कि इस घराट पनचक्की को वह अपनी 7 पीढ़ियों तक संजोोए रखना चाहते हैं और इसके लिए वे सरकार को टैक्स भी देते रहे हैं।

उनका कहना है कि उनके बाप दादा पड़ दादा सब ने अपने परिवार का पालन पोषण इसी घराट से किया और सारे आसपास के गांव के लोग इसी घराट का आटा लेने के लिए पहुंचते हैं ।

क्योंकि इसका आटा बहुत ही पौष्टिक होता है और हर तरह के तत्व इस में विद्यमान रहते हैं जो कि शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है आज भी लोग घराट का आटा खाना बहुत पसंद करते हैं।

हालांकि इस परिवार का कहना है कि इस घराट पनचक्की को वह अपनी 7 पीढ़ियों तक संजोोए रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके बाप दादा पड़ दादा सब ने अपने परिवार का पालन पोषण इसी घराट से किया और सारे आसपास के गांव के लोग इसी घराट का आटा लेने के लिए पहुंचते हैं।

 

ये घराट श्री राम राणा का है । इसका संचालन श्री राम के पिता धनी राम करते आए उसके बाद भाई लक्ष्मण जो की अधरंग के शिकार थे वह अपने परिवार का गुज़ारा इसी चक्की से चलते आए उसके बाद श्री राम ने अपने दो बेटों की और 4 लड़कियों का पालन पोषण तथा शादी इसी चक्की की कमायी से की । ये घराट अब चौथी पिड़ी चला रही है ।

श्रीराम के बेटे करम सिंह और पवन सिंह ने भी अपने बच्चों का पोषण इसी चक्की से किया । करम सिंह के दो बेटे और 2 बेटियाँ है । पवन सिंह कि 4 बेटियाँ और 1 बेटा है । जिनका पोषण इसी चक्की से होता है । आज के आधुनिक जमाने में भी इनकी पीढ़ी इस घराट को चलाना चाहती है ।

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