
ऊना – अमित शर्मा
देश की सीमाओं की रक्षा के दौरान शहादत का जाम पीने वाले उपमंडल गगरेट के गणु मंडवाड़ा गांव के हवलदार अमरीक सिंह का शव जैसे ही घर पहुंचा, तो अश्रुओं की अविरल बहती धारा मानों मां भारती के पैर धोते यही संदेश दे रही थी कि तेरी अस्मिता की रक्षा में यहां के बलिदानी सूरमे कभी पीछे नहीं हटेंगे।
हवलदार अमरीक सिंह का शव पूरे सैन्य सम्मान के साथ सेना के जवान जब घर लेकर पहुंचे, तो मां के करुण क्रंदन और पत्नी व बेटी की वेदना से पत्थर दिल भी पिघल गए।
हर आंख नम थी, तो अमरीक सिंह अमर रहे के नारे हवा में तैर रहे थे। दस जनवरी को श्रीनगर के कुपवाड़ा सेक्टर के माछिल में भारत पाक सीमा की अग्रिम चौकी पर निगरानी के लिए जाते समय बर्फ के बीच सेना का वहां दुर्घटना ग्रस्त हो गया था ।
इस दौरान अमरीक सिंह सहित हमीरपुर का जवान अमित शर्मा व जम्मू के जेसीओ पुरषोत्म सिंह वहां सहित गहरी खाई में समा गए और देश की सीमाओं की रक्षा करते शहीद हो गए थे।
आज पूरे सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ उनका शव गगरेट से उनके पैतृक गांव की ओर चला, तो हर जगह इस वीर सपूत के आगे सिर झुक गए। दौलतपुर से सैकड़ों लोगों के काफिले के साथ शव जैसे ही गणू मंडवाड़ा पहुंचा तो हर आंख नम थी।
शहीद का पार्थिव शरीर करीब सुबह 10 बजे घर पहुंचा। पार्थिव देह घर पहुंचते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। शहीद की पत्नी रुचि, बेटा अभिनव, मां ऊषा देवी, पिता धर्मपाल सिंह, बड़े भाई अमरजीत सिंह और छोटे भाई हरदीप सिंह पार्थिव शरीर को देख बिलख पड़े।
शहीद अमरीक सिंह का चेहरा आखिरी बार देखते ही उनकी पत्नी और मां बेसुध हो गईं। दोनों को रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने ढांढस बंधाया। कुछ देर पार्थिव देह अंतिम दर्शनों के लिए रख गई और इस दौरान परिवार की तरफ से अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं।
प्रशासन की ओर से एसडीएम सौमिल गौतम, तहसीलदार रोहित कंवर, डीएसपी वसुधा सूद व एसएचओ भी मौजूद रहे तो विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी वीर सैनिक के घर पहुंच कर उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित की।
