लीला मेमोरियल एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट सकोह हुआ पंजीकृत

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लीला मेमोरियल एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट सकोह हुआ पंजीकृत, मौसमी फलों का आचार और मोटे अनाज की मिठाईयां बनाने का काम बढ़ायेगा ऍफ़पीओ धर्मपुर

अजय सूर्या – धर्मपुर 

धर्मपुर किसान उत्पादक संघ-एफ़पीओ द्धारा सिद्धपुर ग्राम पंचायत के सकोह गांव में स्थापित किये गए लीला मेमोरियल एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट खाद्य सरंक्षा एवं मानक एक्ट 2006 के तहत 24 जून को पंजीकरण हो गया है।

जिससे अब एफ़पीओ धर्मपुर द्धारा स्थापित इस प्रोसेसिंग यूनिट के उत्पाद राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय बाज़ार में भी बिक्री होंगे।जिसके लिए एफ़पीओ ने माई स्टोर और अन्य आनलाईन मॉर्केटिंग पोर्टलों पर भी पंजीकरण करवा दिया गया है।

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर तथा मंडी में भी इसका बिक्री केंद्र स्थापित किया गया है। ये जानकारी एफ़पीओ के अध्यक्ष सत्तपाल सिंह चौहान और सचिव भूपेंद्र सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि सकोह में स्थापित इस यूनिट के संचालन की जिम्मेवारी रजनी सकलानी और 9 अन्य महिला शेयरहोल्डरों को दी गई है और खड्य पदार्थ विशेषज्ञ डॉक्टर हरदयालसिंह गुलेरिया इसके ट्रेनर और गुणवत्ता नियंत्रक का कार्य देख रहे हैं जो पिछले चालीस वर्ष से खाद्य पदार्थों के निर्माण के लिए प्रशिक्षक का काम कर रहे हैं।

प्रोसेसिंग यूनिट की प्रभारी रजनी सकलानी ने बताया कि यहां पर सभी प्रकार के मौसमी फलों का आचार बनाने और मोटे अनाज के लड्डू और मिठाईयां बनाने का कार्य किया जा रहा है।

जिसके चलते यहां पर कचनार, हरड़, लसूड्डे, बांस, रामबाण औषधि, लहसुन, आम, हल्दी, गलगल, अदरक, अंबाला इत्यादि के अलावा आम का अमचूर पाउडर और जैम भी बनाया जा रहा है।

इसके अलावा गत सर्दियों के मौसम में लाखों रुपए के कोदरे के लड्डू भी तैयार करके बिक्री किये गए हैं।उन्होंने बताया कि पहले हमारे पास इस सामग्री को बाजार में बिक्री करने का लाइसेंस नहीं था इसलिए इसे मार्केट में बिक्री करने में अड़चनें आ रही थी लेकिन अब वे बड़े पैमाने पर इन सब खड्य पदार्थो का उत्पादन करेंगे और उसकी बिक्री करेंगे।

उन्होंने बताया कि वे अब अगले सीज़न में ढींगरी मशरूम की खेती भी करने जा रहे हैं और उसका भी आचार तैयार किया जायेगा।

यहीं नहीं इस बरसात में वे उन पौधों को ज्यादा संख्या में लगाने जा रहे हैं ताकि अगले साल ये सब मौसमी फल व अन्य पौधे ज्यादा मात्रा में तैयार हो सकें।

एफ़पीओ अध्यक्ष सतपाल सिंह ने बताया कि महिलाओं द्धारा अपनी आजीविका कमाने के लिए संगठित होकर जो प्रयास किये जा रहे थे उसे मार्केट के साथ जोड़ने का काम एफ़पीओ द्धारा किया जा रहा है और अभी पिछले एक साल के कार्यों की समीक्षा करने से ऐसा लगता है कि आने वाले कुछ वर्षों में धर्मपुर में हो रहे ये प्रयास एक मॉडल बन सकते हैं और इससे ग्रामीण विकास और सुदृढ़ होगा।

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