
ब्यूरो- रिपोर्ट
जेबीटी प्रशिक्षुओं का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार जेबीटी कमीशन का रिजल्ट नहीं निकालना चाहती तो फिर जेबीटी की ट्रेनिंग क्यों करवाई जा रही है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के बाहर जेबीटी प्रशिक्षुओं की हड़ताल चौथे दिन में प्रवेश कर गई है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से उन्हें किसी भी तरह का आश्वासन नहीं मिला है।
करीब 40 हजार जेबीटी प्रशिक्षु इंतजार में है कि जेबीटी कमीशन की भर्ती को रिजल्ट घोषित किया जाए। 2019 से ये प्रशिक्षु कमीशन और बैचवाइज भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। इसी के चलते अब ये प्रशिक्षु क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। प्रदेश के स्कूलों में अभी भी जेबीटी के 3500 के करीब पद खाली है।
गौर रहे कि राज्य सरकार ने स्कूलों में जेबीटी के खाली पदों को भरने के लिए वर्ष 2019 को कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से भर्तियां निकाली थी। 12 मई 2019 में हजारों प्रशिक्षुओं ने जेबीटी कमीशन की परीक्षा दी थी। अभी तक इसका रिजल्ट नहीं निकाला गया है।
वर्ष 2020 में बैच वाइज आधार पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए हर जिला में काउंसिलिंग हुई पर रिजल्ट घोषित नहीं किया गया। प्रशिक्षु सालों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते उनका यह इंतजार और लंबा होता जा रहा है।
हिमाचल में डीएलएड व जेबीटी की ट्रेनिंग कर चुके और ट्रेनिंग कर रहे अभ्यर्थिंयों ने संयुक्त मोर्चा बनाया है। इसमें 40 हजार के करीब अभ्यार्थी शामिल हैं।
सभी ने अब सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि भर्ती प्रोसेस इस महीने शुरू नहीं किया जाता तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कोर्ट में है मामला
जेबीटी भर्तियों को लेकर मामला प्रदेश उच्च न्यायलय में विचाराधीन है। पहले हाई कोर्ट में भर्ती में बीएड डिग्रीधारकों को पात्र माना था। इसके बाद राज्य सरकार ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। कोर्ट ने जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्रीधारकों को शामिल करने के अपने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई 22 फरवरी को होनी है।
