हिमखबर डेस्क
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस में महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। गर्भवती महिला मेडिकल कॉलेज नाहन के लिए जा रही थी।
अब जच्चा और बच्चा को मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि एचआरटीसी की बस में बच्चे के जन्म का शायद यह पहला मामला है।
मिली जानकारी के मुताबिक कुंहट-हरिपुरधार-रेणुकाजी-नाहन रूट पर चलने वाली एचआरटीसी बस शुक्रवार शाम करीब सात बजे ददाहू से नाहन के लिए रवाना हुई थी।
इसी दौरान मलगांव के पास गर्भवती महिला सरोज अपने पति और सास के साथ प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज नाहन जाने हेतु बस में सवार हुई।
परिवार बस की सबसे पिछली सीट पर बैठ गया। बताया जा रहा है कि बस जब जमटा से आगे दोसड़का के समीप पहुंची तो महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
महिला के दर्द से कराहने पर बस में मौजूद पुरुष यात्री आगे की सीटों पर चले गए, जबकि कुछ महिलाएं उसकी मदद के लिए पीछे पहुंच गईं।
इसी दौरान हालात ऐसे बने कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने बस में ही बच्ची को जन्म दे दिया। घटना के बाद बस में सवार एक यात्री ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी, जबकि चालक ने भी बस को नाहन की ओर तेजी से बढ़ाया।
बनोग के समीप 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और जच्चा व नवजात को एंबुलेंस के माध्यम से मेडिकल कॉलेज नाहन पहुंचाया गया।
गायनी विभाग एचओडी डॉ. अमोद सिंह के बोल
मेडिकल कॉलेज नाहन के गायनी विभाग के एचओडी डॉ. अमोद सिंह ने बताया कि महिला ने शुक्रवार शाम करीब सवा 8 बजे बस में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल में मां और नवजात दोनों का उपचार किया जा रहा है और दोनों की हालत स्थिर है।
27 मार्च निर्धारित थी डिलीवरी डेट
बताया जा रहा है कि महिला की डिलीवरी डेट 27 मार्च निर्धारित थी। एहतियात के तौर पर परिवार उसे पहले ही मेडिकल कॉलेज नाहन ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसव हो गया। बताया जा रहा है कि यह महिला का दूसरा बच्चा है।
बस में प्रसव मां और नवजात के लिए था बड़ा जोखिम
महिला की डिलीवरी डेट 27 मार्च निर्धारित थी और एहतियात के तौर पर परिवार उसे पहले ही मेडिकल कॉलेज नाहन ले जा रहा था। हालांकि रास्ते में अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही बस में डिलीवरी हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह बस में प्रसव होना मां और नवजात दोनों के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता था, क्योंकि ऐसी स्थिति में जरूरी चिकित्सकीय सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध नहीं होते।
हालांकि इस मामले में बस में मौजूद महिलाओं की मदद और समय पर मिली 108 एंबुलेंस सेवा के चलते जच्चा और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।

