
कहते हैं कि सफलता की लंबी और सफल उड़ान वही लोग भरते हैं, जिनके हौसलों में जान होती है। कठिन परिश्रम के साथ लक्ष्य के सही निर्धारण से कायनात भी पूरा साथ देती है। कुछ ऐसी ही कहानी ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बड़सर के गांव कनोह निवासी सुशील भारद्वाज की.
हमीरपुर – हिमखबर – डेस्क – व्यूरो रिपोर्ट
कहते हैं कि सफलता की लंबी और सफल उड़ान वही लोग भरते हैं, जिनके हौसलों में जान होती है। कठिन परिश्रम के साथ लक्ष्य के सही निर्धारण से कायनात भी पूरा साथ देती है। कुछ ऐसी ही कहानी ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बड़सर के गांव कनोह निवासी सुशील भारद्वाज की है।
जिंदगी में हर कोई एक बढिय़ा सी नौकरी की हसरत रखता है, लेकिन मुंबई से सिविल इंजीनियर की डिग्री करने के बाद सुशील भारद्वाज ने कुछ अलग करने की सोची तथा महज 28 साल की उम्र में वर्ष 2016 में 3-4 इंजीनियर के साथ एक कंपनी बनाकर अपने करियर की शुरूआत कर दी।
शुरू से ही उनकी सोच थी कि कुछ ऐसा करें कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकें। कुछ कर गुजरने का सपना लेकर आगे बढ़े सुशील की कंपनी में इस समय 500 से ज्यादा इंजीनियर एवं अन्य कर्मचारी हैं।
इस समय 34 वर्षीय सुशील भारद्वाज की सिविल मंत्रा इंफ्राकान प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ फ्रैश सिविल इंजीनियरों व लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियरों की उम्दा टीम जुड़ी हुई है। देशभर में उनकी कंपनी की शाखाएं फैली हुई हैं।
केंद्रीय मंत्रालय के बड़े प्रोजैक्टों के डिजाइन व निगरानी करती है कंपनी
अल्पकाल में ही कंपनी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग के निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। कंपनी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग के टनल, ब्रिज, डैम व अंडर ग्राऊंड पार्किंग जैसे बड़े प्रोजैक्टों के डिजाइन बनाने के साथ निर्माण कार्यों की निगरानी भी करती है।
एक्सीलैंस इन डिजाइन इंजीनियरिंग के लिए मिला अवार्ड
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले माह एनडीएमसीसी कन्वैंशन सैंटर दिल्ली में इंट्रैक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनोमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में छोटी उम्र उनकी अचीवमैंट को देखते हुए एक्सीलैंस इन डिजाइन इंजीनियरिंग में इंडियन अचीवर के प्रतिष्ठित अवार्ड से नवाजा है। यह अवार्ड पाने वाली अन्य हस्तियों में परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव व बाना सिंह तथा अन्य भी रहे।
टीम सदस्यों की मेहनत से मिला अवार्ड : सुशील
सुशील भारद्वाज का कहना है कि वह कंपनी की टीम को कभी कर्मचारी नहीं समझते हैं, बल्कि अपने पारिवारिक सदस्यों की तरह उनके हर दुख-सुख में भी साथ देते हैं। उन्हीं की मेहनत से कंपनी ने अब तक यह मुकाम हासिल किया है।
