मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बीबीएन की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर संकट; 25 फीसदी महंगा हुआ यार्न, करोड़ों का कारोबार खतरे में

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बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ / सोलन – रजनीश ठाकुर 

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और वैश्विक व्यापार मार्गों में पैदा हुई अनिश्चितता का असर अब हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) के करोड़ों रुपए के टेक्सटाइल उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है।

कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल, शिपमेंट में देरी और लॉजिस्टिक लागत बढऩे से उद्योगों के सामने उत्पादन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

उद्योग जगत का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार तीनों पर पड़ सकता है। बीबीएन क्षेत्र में यार्न निर्माण, बुनाई इकाइयों, कपड़ा निर्माण और रेडीमेड परिधान उद्योग का बड़ा नेटवर्क मौजूद है।

यहां वर्धमान टेक्सटाइल्स, बिड़ला टेक्सटाइल्स, विनसम, सिद्धार्था, दीपक स्पिनर्स और सारा टेक्सटाइल्स समेत कई प्रमुख इकाइयां संचालित हैं, जिनका कारोबार देश और विदेश दोनों बाजारों से जुड़ा हुआ है।

उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार टेक्सटाइल उद्योग में उपयोग होने वाले कई कच्चे माल सीधे तौर पर पेट्रोकेमिकल्स से जुड़े होते हैं। मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ रहा है।

निर्माताओं का कहना है कि पॉलिएस्टर, सिंथेटिक यार्न और अन्य मैन-मेड फाइबर की लागत में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके अलावा केमिकल, कलर (डाई), पैकेजिंग मटीरियल और अन्य रॉ मटेरियल की कीमतों में भी लगातार इजाफा हुआ है, जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है।

उद्योगों का कहना है कि कई इकाइयों के पास फिलहाल 10 से 15 दिन का ही कच्चे माल का स्टॉक बचा है। यदि आयातित सामग्री की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

मध्य पूर्व के समुद्री व्यापार मार्गों में अस्थिरता के कारण शिपमेंट व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई कंटेनर शिपमेंट फिलहाल होल्ड पर हैं और समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण निर्यात माल की डिलीवरी में सात से 10 दिन तक की देरी हो रही है।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक लॉजिस्टिक लागत में भी तीन से चार प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

सिद्धार्था स्पिनिंग मिल के आरजी अग्रवाल का कहना है कि उत्पादन लागत बढऩे के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीददार बढ़ी हुई कीमतों पर तैयार माल खरीदने को तैयार नहीं हैं। इससे कई इकाइयों के लिए उत्पादन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

वर्धमान टेक्सटाइल्स बद्दी के अध्यक्ष आईजेएमएस सिद्धू ने कहा कि अमरीका द्वारा टैरिफ में बढ़ोतरी और वैश्विक व्यापार में आई बाधाओं के कारण सिंथेटिक फाइबर जैसे कच्चे माल की उपलब्धता में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई लागत ग्राहकों द्वारा स्वीकार नहीं की जा रही है, जिससे विनिर्माण पर दबाव बढ़ गया है।

इसी तरह की चिंता जताते हुए बिड़ला टेक्सटाइल्स के यूनिट हैड रोहित अरोड़ा ने कहा कि परिधान उद्योग पूरी तरह समयबद्ध ऑर्डरों पर आधारित होता है और सप्लाई चेन में थोड़ी सी भी देरी का असर सीधे तैयार उत्पाद और निर्यात पर पड़ता है।

उन्होंने बताया कि समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण निर्यात ऑर्डरों की डिलीवरी में सात से 10 दिन तक की देरी हो रही है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

सारा टेक्सटाइल्स के महाप्रबंधक उमेश भदोरिया ने बताया कि मध्य पूर्व के व्यापार मार्गों में आई अनिश्चितता के कारण ंकंपनी अब अमरीका और ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैए ताकि निर्यात कारोबार को स्थिर रखा जा सके।

उद्योग जगत का कहना है कि मौजूदा हालात का असर केवल वर्तमान उत्पादन पर ही नहीं बल्कि अगले वित्तीय वर्ष के घरेलू बाजार और निर्यात ऑर्डरों पर भी पड़ सकता है।

यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो बीबीएन का टेक्सटाइल उद्योग गंभीर आर्थिक दबाव में आ सकता है और इसका असर रोजगार पर भी पडऩे की आशंका है।

नालागढ़ के टॉवल उद्योग पर भी असर

बीबीएन क्षेत्र में विशेष रूप से नालागढ़ के टॉवल निर्माण उद्योग पर भी इस संकट का असर देखने को मिल रहा है। उद्योग सूत्रों के अनुसार कई इकाइयों में करोड़ों रुपए का तैयार माल गोदामों में पड़ा हुआ हैए क्योंकि शिपमेंट में देरी और नए ऑर्डरों में आई सुस्ती के कारण निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसी बीच, कुछ उद्योगों ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश भी शुरू कर दी है।

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