भारतीय संस्कृति एवं भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है रक्षाबंधन का त्यौहार:- नितिश कुमार राठौर

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लुधियाड- शिबू ठाकुर

इस पर्व पर अपने विचार युवाओं के सामने रखते हुए राठौर ने रक्षाबंधन के महत्व और इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा रक्षाबंधन पर्व भाई बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार हर साल श्रावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. बहन भाई के इस पवित्र त्योहार के दिन बहन अपने भाई को प्यार के डोर के रूप में राखी बांधती हैं. यह त्योहार प्यार का अटूट बंधन दर्शाता है.

रक्षाबंधन का अर्थ ही है रक्षा के लिए बांधा गया बंधन. इसलिए बहन अपनी हर प्रकार से रक्षा के लिए अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं. राखी बंधवाने के बाद भाई अपनी बहन को प्यार से पैसे या तोहफा देता है, और अपनी बहन का सदैव रक्षा करने का वचन देता है.

रक्षाबंधन के इतिहास की बात करें तो यह त्योहार सदियों पुराना है और इस त्योहार के शुरूआत की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. आज हम आपको वही इतिहास से रूबरू कराएंगे जिसे रक्षाबंधन का शरूआत माना जाता है.

माना जाता है कि राक्षस राज बलि के विनती को स्वीकार कर भगवान नारायण पाताल लोक में रहने चले गए थे. भगवान विष्णु के जाने के बाद मां लक्ष्मी काफी परेशान हो गईं. फिर उन्होंने नारायण को वापस लाने के लिए गरीब महिला का रूप लिया और राजा बलि के सामने पहुंची और उन्हे राखी बांधी.

राखी बंधवाकर राजा बलि ने कहा मेरे पास आपको देने के लिए कुछ नहीं है। इस पर गरीब महिला के रूप से मां लक्ष्मी अपने वास्तविक स्वरूप में आ गईं, और राजा बलि से कहा आपके पास तो स्वयं नारायण है, मैं उन्हें ही लेने आई हूं.

इसके बाद भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ जाने लगे. जाते वक्त भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया और कहा कि वह हर साल चार महीने पाताल में आके वास करेंगे. यह चार महीने चातुर्मास के रूप में जाने जाते हैं. कहा जाता है कि मां लक्ष्मी को राजा बलि को राखी बांधने के दिन से ही रक्षाबंधन की शरूआत हुई है।

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