फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की साख दाव पर, पहले कुल्लू घूस प्रकरण अब मंडी में तेल का खेल, साहब! सो रुपए की सालाना फीस पर चला रहे थे फैक्टरी, सहायक आयुक्त ने कायदे कानून भी भेज दिए तेल लाने।
मंडी – अजय सूर्या
पहले जिला कुल्लू की सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा का विजिलेंस द्वारा घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा जाना और अब जिला मंडी के असीस्टेंट कमीशनर फूड एंड सेफ्टी पर नियमों की अवहेलना कर तेल की फैक्टरी चलाने के आरोपों ने एक सवाल तो यह खड़ा किया है कि विभाग में बहुत कुछ सही नहीं हो रहा।
दूसरा यह कि क्या यह उच्चाधिकारियों के ध्यान में है या फिर जानबूझकर इसे नजर अंदाज किया जा रहा है। हालांकि इस मामले की शिकायत एसपी विजिलेंस मंडी, हाई कोर्ट, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव, निदेशक खाद्य सुरक्षा और जिलाधीश मंडी के पास भी पहुंची है। लेकिन आगे क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है यह देखने वाली बात होगी।
इस मामले से जुड़े शिकायतकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट परमजीत ढटवालिया के अनुसार जब इस फैक्टरी से जुड़े उत्पादों पर अंकित रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच की, तो यह सामने आया कि फैक्टरी केवल 100 रुपए की सालाना फीस पर चलाई जा रही है।
जबकि नियमों के अनुसार तेल उद्योग का संचालन केवल रजिस्ट्रेशन से नहीं, बल्कि वैध लाइसेंस से संभव है, जिसकी सालाना फीस 2 से 5 हजार तक होती है।
इसके साथ ही नियमों के अनुसार, तेल से संबंधित उद्योग चलाने के लिए फैक्टरी में प्रयोगशाला (लैब) होनी चाहिए और एक योग्य व्यक्ति की नियुक्ति अनिवार्य है। लेकिन इन शर्तों की अनदेखी करते हुए अधिकारी ने अपनी ही पत्नी के नाम पर लाइसेंस जारी करवा लिया।
शिकायतकर्ता द्वारा पूरे दस्तावेजों के साथ उजागर की गई इस सच्चाई को सत्ता परिवर्तन का दम भरने वाली सरकार कितनी गंभीरता से लेती है यह देखने वाली बात होगी।
इन खुलासों से एक बात तो स्पष्ट है कि बड़े पदों पर बैठे अधिकारी पावर का पूरी तरह से दुरुपयोग तो कर ही रहे हैं साथ ही प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही।
मंडी के अलावा कुल्लू व लाहौल स्पिती का अतिरिक्त कार्यभार
मंडी के असिस्टेंट कमिशनर पर आरोप लगे हैं कि वह खुद की ही अपनी खाद्य तेल की फैक्ट्री लगाकर दुकानदारों, होटल कारोबारियों व अन्य कारोबारियों को तेल बेचते हैं।
उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से अपने घर के पास तेल की फैक्ट्री लगा रखी है। दरअसल संबधित अधिकारी के पास मंडी जिला का कार्यभार है।
इसके साथ ही जिला कुल्लू और लाहौल स्पिती का भी अतिरिक्त कार्यभार है। ऐसे में यह अधिकारी तीनों जिलों में अपने फैक्टरी में बना तेल दुकानदारों को बेच रहा है।
सजा और जुर्माने का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा मानक नियम के मुताबिक कोई भी कोई भी अधिकारी या उसके परिवार का सदस्य किसी भी तरह का वो व्यापार नहीं कर सकता जिसमें वो बड़े ओहदे पर विराजमान हो।
साथ ही भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा के नियम 202 में इस तरह के कार्य करने पर एक वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।
मात्र ₹100 सालाना फीस में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मंडी चला रहे तेल की फैक्टरी — सरकारी तंत्र को लगाया चूना, कई नियमों को दिखाया ठेंगा।