
बिलासपुर – सुभाष चंदेल
जल शक्ति विभाग में महासचिव के त्यागपत्र से खाली हुए पद पर तथाकथित प्रधान द्वारा एक दिन पहले महासचिव के पद पर तेजिंदर पाल को मनोनीत करने का अधिकार नहीं है। संघ में महासचिव व वित्त सचिव के पद पिछले 3 महीने से उनके त्यागपत्र द्वारा खाली चले आ रहे हैं।
संतोष शर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य कार्यकारणी का गठन 1 वर्ष 6 माह पहले किया गया था लेकिन प्रधान की नाकामी की वजह से उन्हें महासचिव के पद से व श्री भक्त राम को वित्त सचिव के पद से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
क्योंकि प्रधान ने संघ की आज तक एक भी बैठक नहीं बुलाई व कर्मचारियों की चिरकाल से चली आ रही मांगों को सरकार के समक्ष उठाने में जहमत नहीं उठाई। उन्होंने अपना प्रधान पद अपने निजी स्वार्थ व राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इस्तेमाल किया जिसे प्रदेश के सभी लिपिक वर्गीय कर्मचारी जानते हैं।
संतोष शर्मा ने यह भी कहा कि प्रधान को महासंघ के संविधान का ज्ञान होना चाहिए कि कौन से पद मनोनीत होते हैं और कौन से पद जनरल हाउस में निर्वाचित किए जाते हैं । उन्होंने प्रदेश के कर्मचारियों से अपील की है कि तथा कथित प्रदान की कार्यप्रणाली पर गंभीरता से विचार करें कि भविष्य में हमारे अधिकारों की रक्षा कैसे की जाती है।
संतोष शर्मा ने यह भी कहा कि मैंने स्वयं श्री तेजेंद्र पाल से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि किसने मुझे महासचिव के पद पर मनोनीत किया है।
संघ के प्रधान ऑनर बरठा एक स्वयंभू प्रधान बनकर लोगों में भ्रांतियां फैला रहे हैं और संघ के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि प्रधान अपनी मर्जी से संघ के पदों पर कर्मचारियों को मनोनीत कर रहे हैं जो कि संविधान के दायरे में नहीं आता है।
जिसे संघ के संविधान का ज्ञान नहीं है, वह कर्मचारियों की समस्याओं को कैसे सरकार के समक्ष उठा सकता है। संतोष शर्मा ने कहा कि मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के जिला के चुनाव 15 अप्रैल तक पूर्ण करा दिए जाएंगे तथा राज्य कार्यकारिणी के चुनाव अप्रैल माह के अंत में पूर्ण करवाए जाएंगे इसके लिए सभी जिलों को भी अवगत करवा दिया जाएगा।
