ज्वाली – अनिल छांगु
पौंग झील में मछली पकड़ने का कारोबार करने वाले 2500 मछुआरों को अभी तक 2021-22 तथा 2022-23 का बन्द सीजन राहत भत्ता न मिलने से मछुआरों में भारी रोष है। मछुआरे बन्द सीजन राहत भत्ता के लिए तरस रहे हैं।
दी फिशरीज सोसायटीज एसोसिएशन पौंग डैम रिजर्वियर के अध्यक्ष जसबन्त सिंह व महासचिव कमल कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बरसात के मौसम में मत्स्य प्रजनन का समय होने के कारण दो माह के लिए मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है तथा ऐसे में मछुआरों को परिवार का पालन-पोषण करने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए बन्द सीजन राहत भत्ता दिया जाता है परन्तु दो वर्ष से मछुआरों को बन्द सीजन राहत भत्ता नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि मछुआरों का चूल्हा नहीं जल रहा है तथा दुकानदार मछुआरों को उधार में सामान नहीं दे रहे हैं। मछुआरों के हित में चलाई गई नील क्रांति आवास योजना को भी बन्द कर दिया गया है। बार-बार सरकार व मत्स्य विभाग को इसके बारे में अवगत करवाया गया लेकिन सरकार व विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।
जसबन्त सिंह व कमल कुमार ने कहा कि मछुआरे गर्मी, सर्दी व बरसात में अपनी जान को जोखिम में डालकर पौंग झील के गहरे पानी में मछली पकड़ने जाते हैं तथा उनके द्वारा पकड़ी गई मछली से सरकार व मत्स्य विभाग को करोड़ों का लाभ होता है लेकिन मछुआरों के हितार्थ कुछ भी नहीं हो पाता है।
उन्होंने कहा कि मछुआरों के साथ सरकार व मत्स्य विभाग द्वारा भेदभाव की राजनीति की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सूक्खु व मत्स्य पालन मंत्री से मांग की है कि मछुआरों के हित को देखते हुए नील क्रांति आवास योजना को शुरू किया जाए तथा दो साल का बन्द सीजन राहत भत्ता भी अतिशीघ्र दिया जाए ताकि मछुआरों को राहत मिल सके।

