शिमला, जसपाल ठाकुर
कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार कॉलेज छात्रों को बिना परीक्षा के प्रमोट करने पर कैबिनेट में फैसला लेगी। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जा रहा है। कॉलेज प्रधनाचार्यो, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव को शामिल किया गया है। शिक्षा विभाग ने 7 बिंदुओं पर सुझाव मांगे थे।
कॉलेज प्रधानाचार्य के अलावा कई संगठनों और हितधारकों के सुझाव आए है। इसमें कहा गया है कि कोरोना के खतरे को देखते हुए फिलहाल परीक्षा करवाना उचित नहीं होगा। इससे शिक्षकों के साथ छात्रों में भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। सुझाव में कहा गया है कि कोरोना से बिगड़ते हालात को देखते हुए छात्रों को प्रमोट कर देना चाहिए।
अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा स्थिति सामान्य होने के बाद करवाई जानी चाहिए। प्रधानाचार्य और शिक्षकों की ओर से आए सुझाव में ऑनलाइन पढ़ाई में कई तरह के बदलाव की बात कही गई है। खासकर विज्ञान संकाय के छात्रों के लिए टू वे कम्युनिकेशन पढ़ाई के लिए अनिवार्य करने का सुझाव आया है। यानी शिक्षिका छात्रों से सीधा संवाद होना चाहिए ताकि छात्र भी अपने सवाल पूछ कर अपनी शंकाओं को दूर कर सकें।
प्रधानाचार्य ने अपने सुझाव में कहा है कि कॉलेजों को स्थिति सामान्य होने के बाद ही खोला जाए। कुछ सुझाव में यह भी कहा गया है कि कॉलेज शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर बुलाया जाए और ऑनलाइन कक्षाओं को ही हाजिरी का आधार माना जाए। निदेशक उच्च शिक्षा विभाग डॉ अमरजीत शर्मा ने कहा गए कॉलेज प्रधानाचार्य से सुझाव आए हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जा रही है। प्रमोट करने कॉलेज खोलने पर फैसला राज्य सरकार लेगी।