हिमखबर डेस्क
विशेष पोक्सो अदालत हमीरपुर ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी दादा को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता के पुनर्वास के लिए 10.30 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
विशेष न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी की अदालत ने यह फैसला 23 जनवरी 2026 को सुनाया। मामला जिले के एक पुलिस थाना में वर्ष 2022 को दर्ज हुआ। बाद में महिला पुलिस थाना हमीरपुर में मामला स्थानातंरित हुआ और गहन जांच के बाद अदालत में चालान पेश हुआ।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने विश्वास के रिश्ते को तार-तार करते हुए लंबे समय तक नाबालिग बच्ची के साथ यौन अपराध किया। पीड़िता विशेष रूप से दिव्यांग (बधिर एवं मूक) होने के कारण अपराध की गंभीरता और भी बढ़ जाती है। कोर्ट ने इसे अत्यंत जघन्य अपराध करार दिया है।
आरोपी 71 वर्षीय दादा ने एक नहीं, बल्कि कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। वर्ष 2017 में जब पीड़िता महज पांचवीं कक्षा में विशेष बच्चों के स्कूल में पढ़ती थी, तब से उसके साथ दुष्कर्म को अंजाम दिया जा रहा था। सितंबर 2022 में पीड़िता स्कूल में पहुंची तो उसने इशारों से अपने शिक्षक को आपबीती सुनाई।
उसने बताया कि उसके दादा ने अश्लील वीडियो दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म किया है। शिक्षक ने संस्थान के प्रधानाचार्य को इसकी सूचना दी और मामले में जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी दादा ने अपनी ही पोती के साथ घर में दुष्कर्म किया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
अदालत ने दोषी को पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 25 वर्ष कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 506 आईपीसी के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास व जुर्माना, पोक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत एक वर्ष का कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

