नगरोटा फल विधायन केंद्र को पार लगाने के लिए चाहिए 33 करोड़, पुराना भवन-मशीनरी किसानों को लाभ देने में नाकाम

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सरकार की सुस्त व्यवस्था से प्रदेश झेल रहा 100 करोड़ का नुकसान 

नगरोटा बगवां- बर्फू 

वर्ष 1974 में हिमाचल निर्माता डा. वाईएस परमार द्वारा स्थापित नगरोटा फल विधायन केंद्र प्रदेश उद्यान विभाग द्वारा हिमाचल में स्थापित आठ केंद्रों में से एक है , जिसकी वार्षिक क्षमता 120 मीट्रिक टन है।

प्रदेश में सब्जी और फलों के छह हजार करोड़ रुपए के वार्षिक उत्पादन पर प्रतिवर्ष होने वाले 100 करोड़ के नुकसान को रोकने के लिए ऊक्त केंद्र किसान उत्पादों के विधायन, कैनिंग और सामुदायिक कैनिंग सेवा के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थापना मानी जाती रही है।

बाबा आदम के समय का ढांचा, पुरानी मशीनरी तथा विभाग की उदासीनता की वजह से ऊक्त केंद्र अब सरकार के लिए सफेद हाथी साबित होने लगे हैं, तो वहीं विगत डेढ़ दशक से किसानों और बागबानों को भी इनका अपेक्षित लाभ देने में नाकाम साबित हुआ है।

वर्षों पहले प्रशासन द्वारा असुरक्षित घोषित ढांचे में चल रहे उक्त केंद्र को अपग्रेड करने के लिए विभाग को 33 करोड़ रुपए चाहिए, ताकि उक्त केंद्र अपने नाम को सार्थक कर सके।

निकट भविष्य में विशेषकर निचले हिमाचल में एशियन विकास बैंक के सौजन्य से करीब एक हजार क्लस्टर के तहत 10 हजार हेक्टेयर भूमि में फलों की खेती को बढ़ावा देने की योजना शुरू हुई है, जिसके चलते फल विधायन केंद्रों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बड़े पैमाने पर अनुभव की जाने लगी है।

स्थानीय विधायक अरुण मेहरा की पहल पर वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ने नवंबर 2020 में उक्त केंद्र का दौरा कर मृत शैय्या पर पड़े उक्त केंद्र को पुनर्जीवित करने का भरोसा तो दिलाया, लेकिन केंद्र के जीर्णोंद्धार के लिए विभाग द्वारा तैयार की गई विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक विभाग को 33 करोड़ रुपए की दरकार है , जिसके आने पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्र द्वारा केवल केवल आठ तरह के जैम, आचार, चटनी, जूस, स्कवैश व कैंडी आदि तैयार की जाती रही है, जबकि उनकी योजना है कि यदि केंद्र को अपग्रेड किया जाता है, तो उत्पादों की संख्या अढ़ाई गुना बढ़ाई जाएगी।

ग्राहकों को आकर्षित करने के प्रयास

प्रोजेक्ट रिपोर्ट में पुराने ढांचे के पुनरोद्वार, नई मशीनों तथा उपकरणों की खरीद, पैकेज व वाशिंग लाइन बनाने, आलू चिप्स, टोमैटो पेस्ट, पाउच फिलिंग मशीन, आकर्षित बिक्री केंद्र स्थापित करने, मोबाइल वैन, डीहाई ड्रेटर, आवासीय सुविधा, कचरा निष्पादन तथा उत्पादों की गुणवत्ता के साथ मार्केटिंग व्यवस्था को मजबूत करने और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ढर्रे से हटकर प्रयास करने पर बल दिया गया है ।

बजट से किसानों का मिलेगा फायदा

विभाग का यह भी मानना है कि वर्तमान समय में कांगड़ा , हमीरपुर तथा ऊना आदि उक्त केंद्र पर आश्रित क्षेत्रों में दो लाख मीट्रिक टन फलों और सब्जी का उत्पादन होता है, जिसके विभाग की नई परियोजनाओं के चलते और भी बढऩे की संभावना है। उक्त केंद्र के जीर्णोंद्धार से किसानों के आठ करोड़ के नुकसान को रोक पाने में कामयाब होंगे ।

जल्द नए सिरे से होगा जीर्णोंद्धार

विधायक अरुण मैहरा ने बताया कि उक्त केंद्र का मुआयना खुद मुख्यमंत्री को करवाया गया है तथा डीपीआर सरकार के विचाराधीन हैं। जल्द ही केंद्र का नए सिरे से जीर्णोंद्धार करवा तीन जिलों के किसानों बागबानों को लाभान्वित किया जाएगा और बिक्री के बाद शेष बचे किसानों के उत्पादों का समुचित दोहन सुनिश्चित होगा ।

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