त्रयोदश दिनात्मक पक्ष-विशेष- 7 सितंबर से 20 तक 13 दिन का पक्ष होना अशुभ

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आचार्य देश बन्धु शास्त्री – पुजारी शनि मंदिर लोअर सुनहेत हिमाचल प्रदेश

भारतीय ज्योतिष में सभी ग्रहों और नक्षत्रों के द्वारा भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का शुभ अशुभ फल पहले ही प्राप्त किया जाता है। अभी हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबानियों द्वारा जो अतिक्रमण किया गया है तथा अपनी सत्ता पुनः स्थापित की गई है।

उसको यदि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो बहुत सारे तथ्य ऐसे उपस्थित हो रहे हैं जिनके कारण यह वैश्विक समस्या उत्पन्न हुई है और अभी आगे आने वाले कुछ समय में यह समस्या और विकराल होगी। जिससे समस्त विश्व में एक प्रकार से वैश्विक मतभेद बढ़ेगा तथा गृहयुद्ध जैसे हालात उत्पन्न होने लगेंगे। इस सितंबर मास में जो 13 दिन का पक्ष पड़ रहा है जो 7 सितंबर से लेकर 20 सितंबर तक भाद्रपद शुक्ल पक्ष के रूप में रहेगा।

यह 13 दिन का पक्ष ज्योतिष शास्त्र में अच्छा नहीं माना जाता है। इसकी विश्वघस्र पक्ष संज्ञा दी गई है। ज्योतिष में विश्व शब्द का अर्थ संख्यात्मक रूप में 13 होता है तथा यह विश्व शब्द निश्चित रूप से विश्व को एक प्रकार से परिभाषित करता है क्योंकि नामानुगुण ही ज्योतिष शास्त्र में फल का विधान किया जाता है ।

सामान्यतः एक पक्ष में 1 तिथि के क्षय हो जाने के कारण 14 दिन का पक्ष तथा 1 तिथि की वृद्धि हो जाने के कारण 16 दिन का पक्ष होता है किंतु एक ही पक्ष में दो तिथियों का क्षय हो जाना एक खगोलीय घटना है क्योंकि तिथियों का निर्धारण चंद्रमा से होता है । जब चंद्रमा की गति के कारण उसकी कलाएं कम हो जाती हैं तो 13 दिन का पक्ष होता है अर्थात् जब 12 अंशात्मक चंद्र गति सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर पाती है तो ऐसी परिस्थिति में तिथि क्षय की संभावना बन जाती है ।

1 पक्ष में जब ऐसी परिस्थिति दो बार घटित होती है तो 13 दिन का पक्ष उत्पन्न होता है । इसे ही विश्वघस्र पक्ष कहा है । जब यह 13 दिन का पक्ष होता है तब उसके पहले या फिर उसके बाद कुछ वैश्विक परेशानियां विशेषकर युद्ध, नरसंहार जैसे हालात उत्पन्न होते हैं । महाभारत के समय भी 13 दिन का पक्ष था तथा दो ग्रहण एक ही मास में पड़े थे ।

इस समय भी कुछ वैसी ही परिस्थितियां दिखाई दे रही है । 13 दिन का पक्ष होना तथा 1 मास में दो ग्रहण होना ।अभी विगत कुछ माह पहले 26 मई को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगा था तथा 10 जून को सूर्य ग्रहण था, तो वैसी ही महाभारत काल जैसी स्थितियां पुनः विश्व को एक प्रकार से सूचित कर रही है कि आने वाले समय में बहुत बड़ा उथल पुथल होने वाला है।

क्योंकि शोध में यह पाया गया है कि जब भी 13 दिन का पक्ष होता है तो उसके पहले या फिर उसके बाद अथवा उस 13 दिन के पक्ष में ही निश्चित रूप से कुछ ना कुछ वैश्विक परेशानियां युद्ध, महामारी, गृह युद्ध, अकाल इत्यादि विषम परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं । जैसा कि कहा भी गया है कि

त्रयोदशदिने पक्षे तदा संहरते जगत्।

                  अपि वर्षसहस्रेण कालयोगः प्रवर्तते।। 

13 दिन के पक्ष में निश्चित रूप से विश्व में एक प्रकार से संघारकारक नकारात्मक स्थितियां बन जाती है । ऐसी स्थितियां इसके पहले भी कई बार घटित हो चुकी है । 2005 तथा 2010 में 13 दिन का पक्ष हुआ था उस समय भी प्राकृतिक उत्पात बहुतायत मात्रा में हुए थे । जिसमें विश्व में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हुई थी ।

वैश्विक विषम परिस्थितियों के लिए केवल 13 दिन का पक्ष ही जिम्मेदार नहीं है । अपितु इसके साथ-साथ अन्य आकाशीय ग्रह स्थितियां भी विशेष रूप से विचारणीय होती है। चूंकि इस वर्ष का राजा और मंत्री दोनों मंगल है, जो युद्ध का विशेष रूप से कारक होता है और रक्तपात का द्योतक होता है । अतः पूरे वर्ष भर मंगल का प्रभाव विशेष रूप से होने से यह सारी परेशानियां उत्पन्न होने वाली है।

ग्रहण का प्रभाव लगभग 6 महीनों तक रहता है और मई से यदि देखा जाए तो छह मास की अवधि नवंबर में समाप्त हो रही है । अतः नवंबर तक का समय वैश्विक संप्रभुता के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। इस समय विविध देशों में आंतरिक कलह उत्पन्न हो सकते हैं तथा प्राकृतिक उत्पात इत्यादि विशेष मात्रा में आ सकती है। जिसके कारण से देश विशेष को कष्ट हो सकता है । अतः नवंबर तक का समय विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है।

सितंबर माह के मध्य से कुछ ऐसे विशेष ग्रह योग बन रहे हैं जो कोरोना महामारी की तीसरी लहर की ओर संकेत कर रहे हैं । इस मास में गुरु और शनि दोनों वक्री हो रहे हैं और उसी में यह 13 दिन का पक्ष पढ़ रहा है जो भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के लिए कष्टकारी सिद्ध होने वाला है ।

लगभग नवंबर तक का जो समय है इस समय कोरोनावायरस पूरे देश में व्याप्त रहेगा तथा राजनैतिक उथल-पुथल की भी बड़ी संभावना बनती हुई दिखाई दे रही है। जनमानस में विशेष असंतोष की भावना भी होती हुई दिखाई दे रही है। तथा मानव जीवन को कष्ट होता हुआ दिखाई दे रहा है । इन सभी परिस्थितियों से बचने के लिए हमें करोना नियमों का अनुपालन समय-समय पर करना होगा ।

सरकार के द्वारा जो भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं उनका अनुपालन करना होगा तथा अपने अपने इष्ट देवों का स्मरण करना इस महामारी में या ऐसी विषम परिस्थिति में अनुकूल सिद्ध रहेगा।

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