हिमखबर- डेस्क
तुमने तो पूरी कोशिश की, हमारी खिल्ली उड़ाने की
हर जगह हर तरफ, हम फिर भी खिलखिलाते रहे
इस मतबली जमाने में।
तुमने तो पूरी कोशिश की, कि हम जीते जी मर जाए।
हम फिर भी, हंसते रहे मुस्कुराते रहे,
और जीवन की डगर में जीविषा लिए जीते रहे।
तुमने तो पूरी कोशिश की, कि हम जीवन के पथ पर
टूट कर बिखर जाए, हम फिर भी, खुद को एकत्र किए
जीवन के आकाश में, हौसलों की उड़ान से
उड़ते रहे, हर जगह हर तरफ।
मौलिकता प्रमाण पत्र
मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।
राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक)
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