शिमला – नितिश पठानियां
राजधानी शिमला के संजौली इलाके में स्थित ऐतिहासिक जौंनांग बौद्ध मठ से बीते रविवार को रहस्यमय तरीके से लापता हुए तीन नाबालिग भिक्षुओं को पुलिस ने आज ढली बाईपास क्षेत्र से सुरक्षित बरामद कर लिया है। तीनों बच्चों को पुलिस ने परामर्श के बाद मठ प्रशासन को सौंप दिया है और अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे अचानक मठ क्यों छोड़कर चले गए थे।
पुलिस के अनुसार मठ प्रशासन ने 11 मई को जब बच्चों की अनुपस्थिति दर्ज की तो पहले उन्हें खुद ही तलाशने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर 12 मई को ढली थाना पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद बीएनएस की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज कर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
शिमला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीनों नाबालिगों को बुधवार दिन में ढली बाईपास के पास देखा गया, जहां से उन्हें सकुशल मठ प्रबन्धन को सौंपा गया। तीनों बच्चों की उम्र 11 से 13 वर्ष के बीच है और वे पश्चिम बंगाल व अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। बच्चों की काउंसलिंग कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि वे बिना सूचना क्यों चले गए थे।
इस मठ में करीब 150 बच्चे बौद्ध धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि इस तरह बच्चों के अचानक लापता होने की घटना चिंता का विषय है खासकर तब जब करीब एक महीने पहले भी दो अन्य बाल भिक्षु मठ से लापता हो गए थे। हालांकि उस मामले में बच्चे बिना बताए घूमने निकले थे लेकिन रास्ता भटक गए थे और कुछ ही घंटों में पुलिस द्वारा ढूंढ लिए गए थे।
जौंनांग टेकन फुत्सोक चोलिंग मठ तिब्बती बौद्ध परंपरा की जौंनांग शाखा का भारत में एकमात्र केंद्र है। इसकी स्थापना 1963 में अमदो लामा जिन्पा ने की थी। यह मठ एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां रहने वाले सौ से अधिक भिक्षु तिब्बती धार्मिक शिक्षाओं में दीक्षित होते हैं। मठ परिसर रंग-बिरंगे प्रार्थना झंडों से सजा होता है जो तिब्बती संस्कृति में शांति और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।