
शिमला – नितिश पठानियां
आइजीएमसी में शुक्रवार से शल्य चिकित्सा विभाग ने एसोसिएशन आफ गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल एंडोसर्जियन (आइएजीईएस) के संयुक्त तत्वावधान में इंडियन फैलोशिप-इन-गैस्ट्रोएंट्रोलाजी सर्जरी मिनिमल इन्वेजिज विषय पर आयोजित की गई। इस सम्मेलन में लगभग 200 प्रतिष्ठित शल्य चिकित्सक हिस्सा ले रहें हैं।
सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। उन्होंने इस दौरान कहा कि डाक्टर अपने देश के गांव में ही लोगों की सेवा करने के लिए आगे आएं, अमेरिका के गांव में जाकर सेवा करने की जरूरत नहीं हैं।
नर सेवा ही ईश्वर सेवा
नर सेवा ही ईश्वर सेवा है। पुराने और आधुनिक ज्ञान को समझने की जरूरत है। हमारे देश के डाक्टर अब इस बात को समझ रहे हैं। हमारे डाक्टरों के लिए समझना जरूरी हो गया है कि एक आम आदमी को इलाज के दौरान क्या चाहिए होता है। उसे इलाज से ज्यादा डाक्टरों का प्रोत्साहित करना जरूरी है।
डाक्टरों को अपने सेवाकाल के दौरान मरीजों के लिए 100 फीसदी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर मे भी आयुर्वेदा व अन्य सभी इलाज की पुरानी तकनीकों को भुलाया नहीं जा सकता है। नई तकनीक के साथ इनका भी वहीं महत्व है।
राज्यपाल बोले, पुराने और आधुनिक ज्ञान को समझना होगा
राज्यपाल ने कहा कि पुराने और आधुनिक ज्ञान को समझने की जरूरत है। हमारे देश के डाक्टर अब इस बात को समझ रहे हैं। हमारे डाक्टरों के लिए समझना जरूरी हो गया है कि एक आम आदमी को इलाज के दौरान क्या चाहिए होता है। उसे इलाज से ज्यादा डाक्टरों का प्रोत्साहित करना जरूरी है।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में शल्य चिकित्सा से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा व रिसर्च पेपर प्रस्तुत होंगे। इसके अलावा लेप्रोस्कोपिक कौशल को निखारने और मिनिमल इनवेसिव सर्जरी की नई चुनौतियों से निपटने पर भी चर्चा होगी। 20 नवंबर को लाइव वर्कशाप का आयोजन भी किया जाएगा।
आइजीएमसी के सर्जरी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डा आरएस जोबटा ने कहा कि लेप्रोस्कोपी की सर्जरी अब जरूरी है। तीन दिन के सम्मेलन में डाक्टरों की ट्रेनिंग हो रही है। इस कोर्स के दौरान सर्जरी की प्रक्रिया के दौरान हर तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस सर्जरी को हम प्रदेश के जोनल अस्पतालों में भी शुरू करेंगे।
