
पांवटा साहिब घाटी के शेरजंग नेशनल पार्क में वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई।
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
उत्तराखंड की सीमा से सटे पांवटा साहिब में टाइगर की आमद कैमरे में कैद होने के बाद अब गंगूवाला में चार तेंदुओं के एक साथ में तस्वीर भी कैमरे में कैद हो गई है।
पांवटा साहिब घाटी के शेरजंग नेशनल पार्क में वन्य प्राणी विभाग के कर्मियों की अथक कोशिश व मेहनत रंग लाई है, जब एक टाइगर के साथ गंगूवाला में चार तेंदुए भी कैमरे के सामने से गुजरे व कैमरे में कैद हो गए।
गौर हो कि नेशनल पार्क में तकरीबन आधा किलोमीटर दूर बीते 16 जनवरी को टाइगर के पदचिन्ह रिपोर्ट हुए थे। इसके बाद से ही वन्य प्राणी विभाग उन पलों का इंतजार कर रहा था, जब टाइगर की शेरजंग पार्क में होने की तस्वीर क्लिक हो सके।
इसके लिए विभाग ने टाइगर के संभावित ट्रैक पर आठ ट्रैप कैमरे इंस्टॉल किए थे। पदचिन्ह मिलने के एक महीने बाद भी पार्क में एक टाइगर व गंगूवाला में जंग साहिब के बाग में चार तेंदुए की मौजूदगी मायने रखती है।
इसका मतलब यह है कि टाइगर व तेंदुओं को जंगल की आबोहवा रास आ गई है। साथ ही भोजन भी उपलब्ध हो रहा है।
गौरतलब है कि नेशनल पार्क में सांभर, चितल, घोरल, कक्कड़, हिरण, बारहसिंगा, माहा व अन्य प्रजातियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
हिरण की प्रजातियां खासतौर पर टाइगर की पसंदीदा खुराक होती है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि टाइगर ने नेशनल पार्क में शिकार भी किया होगा।
शिमला मंडल के वाइल्ड लाइफ डीएफओ रविशंकर ने कहा कि पहली बार हिमाचल में टाइगर की तस्वीर क्लिक हुई है। पांवटा के गंगूवाला में चार तेंदुए की तस्वीर भी कैमरे में कैद हुई है।
वन विभाग के कर्मचारी पांवटा व इसके आसपास के जंगलों में अपनी पूरी नजर रखे हुए हैं।
वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि राजा जी नेशनल पार्क के पश्चिमी हिस्से से बाघों की आवाजाही को संरक्षित किया जा सकता है। तीन राज्यों के व्यापक परिदृश्य पर प्रोजेक्ट भी बनाया जा सकता है।
