बुजुर्ग-चलने फिरने में असमर्थ मरीजों को हो रही परेशानियां, अतिरिक्त पैसे देकर लेना पड़ रहा आटो रिक्शा का सहारा
काँगड़ा – राजीव जस्वाल
डा. राजेंदर प्रसाद आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में आटो रिक्शा व बस ऑपरेटर के विवाद के चलते टांडा अस्पताल के परिसर के अंदर बसों का आना बंद हो गया। जिस कारण मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब टांडा अस्पताल के मुख्य गेट से मरीजों को पैदल ही अस्पताल के अंदर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा बुजुर्ग व्यक्तियों व चलने फिरने में असमर्थ मरीजों को मुश्किलों को झेलना पड़ रहा है।
दूर दराज के मरीजों को अब स्पेशल आटो रिक्शा में अंदर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। दूर से आने वाले मरीजों को 53 मील से 20 रुपए देकर ईलाज करवाने के लिए टांडा अस्पताल में जाना पड़ रहा है।
जहां बस में केवल सात रुपए में मरीज टांडा अस्पताल के अंदर पहुंच जाते थे। बस के ड्राइवर व कंडक्टर को टांडा अस्पताल के मुख्य गेट पर अस्पताल के सिक्यूरिटी गार्ड अंदर जाने के लिए मना कर रहे हैं और कहते हैं की टांडा अस्पताल के प्रधानाचार्य के सख्त आदेश हैं।
जिसके कारण हमें अंदर नहीं जाने दिया जाता है। इस आटो रिक्शा व बस ऑपरेटर की खींचा तानी के बीच गरीब व असहाय मरीजों को इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है।
प्रधानाचार्य डा. भानु अवस्थी के बोल
टांडा अस्पताल के प्रधानाचार्य डा. भानु अवस्थी ने कहा कि टांडा अस्पताल के साथ के गांव के लोगों के विरोध के बाद बसों को टांडा अस्पताल के मुख्य गेट से परिसर के अंदर आने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
बस कंडक्टर के बोल
बस के कंडक्टर ने कहा की हम सात रुपए किराया ले रहे हैं परंतु अब हमें टांडा अस्पताल के मुख्य गेट से अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है इसलिए हम मुख्य गेट से ही बसों को मोड रहे हैं, जिसके चलते हमें मरीजों के गुस्से को झेलना पड़ रहा है। मरीज कह रहे हैं कि 53 मील से सात रुपए देकर गेट पर ही उतार दिए जा रहे है। यहां से अलग से उन्हें आटो करना पड़ रहा है, जोकि उन पर अलग से 20 रुपए का बोझ पड़ रहा है।
ऑटो रिक्शा यूनियन उप प्रधान के बोल
ऑटो रिक्शा यूनियन टांडा के उप प्रधान राजिंदर ने कहा की हम चार किलोमीटर के 20 रुपए ले रहे हैं हमारी यूनियन ने कहीं से भी चार किलोमीटर के अंतर्गत 20 रुपए रेट रखे हैं इससे अधिक कोई भी ऑटो चालक नहीं ले रहा है।