
किसानों-बागवानों के चेहरों पर छाई मायूसी की लकीरें।
ज्वाली – अनिल छांगू
ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाली अधिकतर पंचायतें कृषि-बागवानी पर निर्भर हैं लेकिन मौसम की बेरुखी के कारण इस बार किसानों-बागवानों के चेहरों पर मायूसी की लकीरें छाई हुई हैं।
ज्वाली क्षेत्र के अधीन कोटला, कथोली, बासा, नगरोटा सूरियां, बरियाल, करडियाल, भरमाड, हरसर, पनालथ, घाड़जरोट, हार, नाणा, बलदोआ, धेवा, पद्दर, नढोली, भाली, त्रिलोकपुर, बेहि पठियार, जवाली, डोल, कुठेड़, भलाड़, आंबल, भाली, सोलदा, जांगल, नरगाला, मतलाहड़, पलौहड़ा, लाहडू, बनोली, मस्तगढ़, फारियां, चलवाड़ा-एक, चलवाड़ा-दो, समकेहड़, बट्ट, पपाहन इत्यादि पंचायतों के लोग कृषि पर निर्भर करते हैं।
इन पंचायतों के लोग कृषक हैं जोकि फसल पैदा करके अपनी आजीविका चलाते हैं तथा अनाज मंडियों में अनाज बेचते हैं। इसके अलावा बागवानी भी लोग निर्भर हैं।
ज्वाली क्षेत्र की पंचायतों में 90 फीसदी लोगों की आय का साधन कृषि-बागवानी है।
किसानों राज कुमार, संदीप सिंह, जगतार,विजय पाल सिंह, रविन्द्र राणा, ने वताया कि किसानों ने गेहूं-जौ-सरसों-पालक-टमाटर-मटर-मूली-शलगम की फसल बीज दी लेकिन बारिश न होने के कारण फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं।
कोहरा पड़ना शुरू हो गया है तथा कोहरे के कारण गेहूं-जौ-सरसों की फसल पीली पड़नी शुरू हो गई है।
किसानों ने कहा कि महंगे दाम पर बीज खरीदकर महंगे दाम चुकाकर ट्रेक्टरों से बीजाई करवाई, महंगे दाम पर खाद खरीदकर डाली और बेसहारा पशुओं व जंगली जानवरों से दिन-रात पहरा देकर फसल बचाई लेकिन अब मौसम की बेरुखी ने किसानों की कमर तोड़ दी।
किसानों को अपनी रोजी-रोटी की चिंता सतानी शुरू हो गई है तथा बैंकों के कर्ज को लेकर भी किसान काफी हताश हैं।
किसानों ने कहा कि अब बारिश नहीं हो रही है और जब गेहूं की फसल कटाई का समय होता है तो बारिशों का दौर शुरू हो जाता है जिस कारण फसल खेत में ही सड़ जाती है।
