
चम्बा, भूषण गुरूंग
सर्दी और जुकाम प्रभावित व्यक्ति को कोरोना के नाम से डराने पर वह मानसिक रूप से परेशान हो सकता है। इसलिए सर्दी और जुकाम वाले व्यक्ति के साथ कोरोना मरीज की तरह व्यवहार न करें।
मनोचिकित्सक डॉक्टर नीरज शर्मा ने बताया कि सर्दी-जुकाम वाले मरीजों को डराने की बजाय प्यार से समझाकर कोरोना टेस्ट करवाने के लिए जागरूक करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना से ग्रसित होता है तो उसे अपने दिमाग में तनाव लेने की बजाय समय पर दवाई लेने पर ध्यान देना चाहिए। समय पर दवाई लेने से मरीज जल्दी कोरोना को मात दे सकता है। जबकि, दिमाग में कोरोना संक्रमण का डर बैठाकर तनाव लेने से वह दिमागी रूप से कमजोर और परेशान हो सकता है।
इससे उसकी इम्युनिटी भी कमजोर हो सकती है। ऐसी हालत में उसकी तबीयत भी बिगड़ सकती है। इसलिए कोरोना संक्रमण से ग्रसित मरीजों को तनाव छोड़कर सिर्फ समय पर दवाई लेने और चिकित्सीय परामर्श पर अमल करने में ध्यान देना चाहिए।
कोरोना संक्रमण को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। उन्हें पढ़कर और देखने के उपरांत भी लोग दिमाग पर अनावश्यक तनाव ले रहे हैं। दिमाग में अनावश्यक तनाव लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि शरीर को तंदरुस्त और स्वस्थ रखने में दिमाग का काफी अहम रोल है। जब आदमी दिमागी तौर से मजबूत होगा, तभी वह बड़ी से बड़ी बीमारी को हराकर स्वस्थ हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सर्दी-जुकाम कोरोना से पहले भी लोगों को होता था। इसलिए ऐसे लक्षणों वाले लोगों को देख सीधे तौर पर कोरोना का तमगा लगाना भी गलत है। ऐसे लक्षण वाले लोग जहां पर भी नजर आएं, उन्हें कोरोना जांच के लिए जागरूक करें। साथ ही लोगों को समझाना चाहिए कि कोरोना का समय पर इलाज करवाकर इस बीमारी से निजात पाई जा सके।
