जीवन-मृत्यु

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हिमखबर – डेस्क

जीवन मृत्यु का भेद, तुमको कुछ बतलाऊंगा।
हो सका तो तुमको, सच्चा जीवन निर्वाह सिखलाऊंगा।

क्षणभर का जीवन, क्षणभर की मृत्यु
फिर भी, तुमको कुछ बतलाऊंगा।

भेदभाव की नीव, जो रखी तुमनें
उसको भी एक दिन मिटाऊंगा।

धर्म के नाम पर, अधर्म तुम करते हो
धर्म की परिभाषा भी तुम, अपनी मर्जी से बदलते हो,
तुमको सच्चा धर्म, एक दिन जरूर सिखलाऊंगा।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा, (भाषा अध्यापक), गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233, rajivdogra1@gmail.com

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