कांगड़ा में सबसे ज्यादा आम का उत्पादन नूरपुर उपमंडल में होता है। इस साल ऑफ सीजन होने के बावजूद नूरपुर क्षेत्र में आम की अच्छी फसल है व आम का सीज़न इस समय पूरे यौवन पर है। नूरपुरी आम की पड़ोसी राज्य पंजाब में भारी मांग है।
नूरपुर, देवांश राजपूत
जिला कांगड़ा में सबसे ज्यादा आम का उत्पादन नूरपुर उपमंडल में होता है। इस साल ऑफ सीजन होने के बावजूद नूरपुर क्षेत्र में आम की अच्छी फसल है व आम का सीज़न इस समय पूरे यौवन पर है। नूरपुरी आम की पड़ोसी राज्य पंजाब में भारी मांग है।
इस समय नूरपुर से रोजाना आम की सैकड़ों गाड़ियां पंजाब की विभिन्न मंडियों में जा रही हैं। जसूर सब्जी मंडी में इस समय 18 से 28 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आम बिक रहा है। बागवान ज्यादा रेट हासिल करने के लिए अपनी फसल पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व जम्मू-कश्मीर की विभिन्न मंडियों में आम बेच रहे हैं।
ऑफ सीजन में आम की अच्छी पैदावार होने व मंडियों में आम का सही रेट मिलने से बागवानों के चेहरे खिले हुए है। नूरपुर क्षेत्र में प्रतिवर्ष आम की फसल का करोड़ों रुपये का व्यापार होता है, जिससे किसानों-बागवानों को काफी लाभ होता है।
एक अनुमान के मुताबिक जिला कांगड़ा में प्रतिवर्ष अनुमानित 50 से 60 करोड़ का आम का व्यापार होता है, जिससे बागवान, व्यापारी, दुकानदार आदि इसके व्यापार से लाभ कमाते है।
नूरपुरी आम की किस्में
नूरपुरी आम की कई प्रजातियां हैं, जिनमें दशहरी, लंगड़ा, मलिका, फजली, चौसा, अमरपाली, अल्फांसो, बांबेग्रीन, रामकेला आदि किस्में पाई जाती हैं। दशहरी आम जून माह के आखिरी सप्ताह से शुरू होकर अगस्त तक चलता है। इसमें रामकेला आम आचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रमुख आम के बगीचे
नूरपुर क्षेत्र में जौंटा, खेल, भडवार, नागनी, सदवां-सुल्याली, जाच्छ, बासा, गनोह, राजा का तालाब, रैहन, छत्तर, गोलवां, दिनी, समलेट, इंदपुर, इंदौरा, डागला, डाह कुलाड़ा, कंदरोड़ी समेत विभिन्न स्थानों पर आम के बगीचे हैं। यहां हर साल आम की भारी पैदावार होती है।
क्या कहते हैं बागवान
नूरपुर क्षेत्र के प्रमुख बागवान सुदर्शन शर्मा, मुकेश शर्मा, मनोज पठानिया, सुदर्शन सिंह, बिशंभर सिंह व जोगिंदर सिंह ने बताया कि इस साल आम की फसल का ऑफ सीजन था। लेकिन इसके बावजूद आम की अच्छी फसल हुई है व रेट भी ठीक मिल रहा है।
इलाके के प्रगतिशील बागवान सुदर्शन शर्मा ने बताया वह अपनी आम की फसल स्वयं मंडी में बेचते हैं व 10 जुलाई तक उनके आम की पैदावार बाजार में आ जाएगी। वहीं कई बागवान पहले से ही अपने बगीचे ठेकेदारों को बेच देते हैं।