जब भाई के सामने खोल दिया दिल का राज, जानिए…सुकेत रियासत की खूबसूरत कहानी

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हिमखबर डेस्क

पांगणा-सुकेत की एक भोली-भाली लडक़ी जब सपनों के राजकुमार की यादों में खो जाती है, तो छोटा भाई स्नेह भरा सवाल पूछता है…दीदी, तू इन दिनों यूं ही खोई-खोई क्यों रहती है? बस यही सवाल उसके मन के दरवाजे को खोल देता है। यह कहानी सुकेत और आसपास की पहाडिय़ों में प्रेम, संकोच और युवा मन की धडक़नों की याद दिलाता है।

इसी कहानी को एल्बम के रूप में अब दर्शकों के सामने लाया जा रहा है, जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है। जानकारी के अनुसार सैलानियों को लुभाने वाली प्राचीन धरोहरों में एक पुनीत-नीतीश गुप्ता जी के पुराने घर ‘राणी री चौकी’ में सुकेती गीत के दृश्य की शूटिंग हुई है।

नैसर्गिक सुंदरता से भरपूर सुकेत रियासत की ऐतिहासिक राजधानी पांगणा-सुुकेत की रहने वाली एक खूबसूरत भोली-सी लडक़ी ने रियासती काल में पहली बार अपने मन में किसी को चाहना शुरू किया था। एक दिन वह सज-संवर कर अपने लकड़ी की खूबसूरत नक्काशी वाले घर के बरामदे की रेलिंग पर बैठी हुई थी।

दूर फैली घाटियों की शीतल हवा उसके चेहरे से बालों को हल्के-हल्के सरका रही थी, पर उसका मन किसी और ही दुनिया में खोया था, उसके अपने प्रिय के इंतज़ार में। वह गहरे विचारों में डूबी थी कि तभी पीछे से कदमों की आहट के साथ उसका छोटा भाई बोला… दीदी, तू इन दिनों यूं ही खोई-खोई क्यों रहती है?

भाई के स्नेह भरे सवाल ने मानो उसके मन के दरवाजे को खोल दिया। सुकेती लडक़ी ने पहले तो धीरे से मुस्कुराकर टालने की कोशिश की, पर फिर अपने सबसे करीबी साथी-मित्र व प्यारे भाई के सामने दिल का राज खोल दिया। उसने बताया कि कैसे उसने किसी के लिए अनकही सी चाह जगाई है, कैसे हर सुबह वह उसी की राह देखती है और कैसे उसका इंतज़ार अब उसके सपनों का हिस्सा बन चुका है।

सच्ची घटना को फिल्मी रूप

इसी छोटी सी सच्ची और सरल घटना ने वर्षों बाद एक लोकगीत ‘कलावतुए बाहमणी गे दाइए’ का रूप ले लिया, जो आज भी सुकेत और आसपास की पहाडिय़ों में प्रेम, संकोच और युवा मन की पहली धडक़नों की याद दिलाता है। इस गीत में संगीत सुरेंद्र नेगी, बांसुरी और शहनाई का स्वर लाभ सिंह का है।

कैमरामैन सन्नी शर्मा;, गायक और अदाकार रंजीत भारद्वाज, मॉडल तनीशा दत्ता और सहयोगी जयंत कुमार व राकेश भारद्वाज हैं। बता दें कि पांगणा-सुकेत-मंडी ही नहीं, अपितु आज हिमाचल प्रदेश में अपनी पहचान बना चुके गायक रंजीत भारद्वाज ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास में योगदान कर रहे हैं। रंजीत भारद्वाज ऐतिहासक नगरी पांगणा-सुुकेत में अपने गीतों की शूटिंग की चहलकदमी कर दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं।

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