
सोलन – रजनीश ठाकुर
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ( सीडीएससीओ) की जांच में हिमाचल के दस उद्योगों में निर्मित 27 तरह की दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर पाई है।
जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए है उनमें उच्च रक्तचाप , बुखार, गैस्ट्रिक, दर्द निवारक, बैक्टीरियल संक्रमण, जुकाम व न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार की दवाएं शामिल है।
सब-स्टैंडर्ड पाई गई दवाओं इन दवाओं का निर्माण पांवटा साहिब, कालाअंब, बद्दी, झाड़माजरी, नालागढ़ स्थित यूनिट में हुआ है। सिरमौर के कालाअंब स्थित एक ही उद्योग में निर्मित एनेस्थीसिया के इंजेक्शन के 14 सैंपल भी जांच में फेल हो गए है।
इसके अलावा गुजरात, उत्तराखंड , हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, पंजाब , बेंगलुरु, ओडिशा, तेलंगाना, बिहार, राजस्थान व सिक्किम स्थित दवा उद्योगों में निर्मित 56 तरह की दवाएं सब-स्टैंडर्ड पाई गई है।
बता दें कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नवंबर माह में देश के अलग अलग राज्यों से 1487 दवाओं के सैंपल एकत्रित किए थे जिनमें से जांच के दौरान 83 दवाएं सब स्टैंडर्ड पाई गई है, जबकि 1404 दवाएं गुणवत्ता के पैमाने पर सही निकली है।
जानकारी के मुताबिक नवंबर माह के ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश में निर्मित 27 दवाओं सहित देश के अन्य राज्यों में निर्मित 56 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं।
सब-स्टेंडड पाई गई इन दवाओं के सैंपल ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट बिहार, हिमाचल, आसाम, मिजोरम, नागालैंड, झारखंड, बिहार, आसाम, ओडिशा, मिजोरम, सीडीएससीओ ईस्ट जोन कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु , सीडीएससीओ नॉर्थ जोन, सीडीएससीओ बद्दी ने जांच के लिए जुटाए थे।
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि सीडीएससीओ द्वारा जारी नवंबर माह के ड्रग अलर्ट में शामिल सभी संबंधित दवा कंपनियों को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्टाक वापस मंगवाने के निर्देश दिए है।
इसके अलावा राज्य दवा नियंत्रक प्राधिकरण व सीडीएससीओ के अधिकारी उन दवा इकाइयों का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे, जिनके सैंपल बार बार फेल हो रहे है।
