चुनावी वादों के बीच ही दबकर रह गया पौंग बांध विस्‍थापितों का मुद्दा, फतेहपुर के 480 परिवारों को नहीं मिला हक

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व्यूरो- रिपोर्ट 

कई वर्ष बीत गए। कई सरकारें आई और चली गई, पर पौंग बांध विस्थापितों को अभी तक भी न्याय नहीं मिल सका है। चुनाव के समय में विस्थापितों को आश्वासन तो उनकी समस्या को लेकर जरूर मिलता है पर चुनाव के बाद यह मुद्दा केवल चुनावी वादों के बीच ही दबकर रह भी जाता है।

फतेहपुर में उपचुनाव को लेकर चुनावी गतिविधियां तेज भी हुई हैं। उन लोगों की उम्मीदें भी चुने जाने वाले प्रतिनिधियों से हैं जोकि वादे तो बहुत करते हैं लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया जाता है।

चाहे वह पहले विधानसभा या फिर उसके बाद लोकसभा के चुनाव हों, हर किसी दल ने पौंग बांध विस्थापितों की समस्या को लेकर मत भी हासिल किए लेकिन उसके बाद उनकी समस्या को हल करने के लिए आवाज को नहीं उठाया।

सरकार चाहे कोई भी प्रदेश में रही हो हर बार मात्र आश्वासनों का ही झुनझुना ही विस्थापितों को मिला है। अब फतेहपुर उपचुनाव में भी एक बड़ा मुद्दा पौंग बांध विस्थापितों को उनकी समस्याओं को हल करने को लेकर है।

फतेहपुर विधानभा क्षेत्र में 480 परिवार

फतेहपुर विधानसभा में इस वक्त के 480 पौंग बांध विस्थापित परिवार हैं। जिन्हें अभी तक मुरब्बो का आवंटन नहीं हो सका है। और यह परिवार यहां पर अब रह रहे हैं। हालांकि फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में पौंग विस्थापितों की संख्या कहीं अधिक भी थी। पर विस्थापन का दंश झेल चुके कई परिवार इस विधानसभा क्षेत्र से अन्य क्षेत्रों में भी जा चुके हैं।

क्‍या कहते हैं भाजपा नेता

ओबीसी वित्त कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष ओपी चौधरी का कहना है भाजपा सरकार का विस्थापितों को उनके हक दिलाना प्राथमिकता में रहा है। इसी का परिणाम है कि भाजपा के प्रयासों से आज हजारों परिवारों को उनके हक मिल चुके हैं, जबकि जो शेष रह गए हैं, उनके लिए भाजपा लगातार प्रयासरत है।

क्‍या मानना है कांग्रेस का

कांग्रेस प्रदेश सचिव रीता गुलेरिया का कहना है भाजपा केवल वोट बैंक के लिए ही विस्थापितों का इस्तेमाल करती है जबकि उनको हक दिलाने के लिए पीछे ही रही है। कांग्रेस सरकार जब भी प्रदेश में थी तो उनके प्रयासों से कई लोगों को उनके हक दिलाए गए जबकि मौजूदा भाजपा सरकार जो शेष विस्थापित वंचित रह गए हैं उनको हक दिलाने में नाकाम रही है।

कब क्या हुआ

1960 में ब्यास नदी पर 360 मेगावाट जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए ब्यास नदी के तट पर पौंग बांध की आधारशिला रखी गई थी।

1964 में केंद्र व प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन भी हुआ था।

1970 में पर्नुवास के लिए भूमि आवंटित भी की गई।

1973 में पौंग में जल भराव भी शुरू हुआ था।

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