खड़ैल के लोगों ने खुद पुल की मरम्मत कर पेश की मिसाल
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
जिस फुटब्रिज की मुरम्मत कई वर्षों से सरकार व स्थानीय पंचायत नहीं कर सकी। उसे खड़ेल और थैना क्षेत्र के लोगों ने एक सप्ताह में कर दिखाया। बता दें कि राजगढ़ ब्लाॅक के पैरवी खड्ड पर खड़ैल में बने पैदल चलने योग्य पुल की हालत बीेते कई वर्षों से बहुत दयनीय हो गई थी।
पुल पर लगे लकड़ी के फट्टे सड़ने के कारण टूट चुके थे। विशेषकर बरसात के दिनों में समूचे डिमण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर इस पुल को लांघते थे।
बीते दिनों विभिन्न समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के उपरांत सरकार अथवा स्थानीय पंचायत ने चुप्पी साध ली। स्थानीय युवाओं ने इस पुल पर लकड़ी के नए फट्टे लगाकर पुल को पैदल चलने योग्य बनाकर एक मिसाल पेश की है।

थैना बसोतरी के उप प्रधान अनिल कुमार के बोल
थैना बसोतरी के उप प्रधान अनिल कुमार ने बताया कि इस पैदल चलने योग्य पुल का निर्माण वर्ष 1980 में किया गया था। उसके उपरांत इस पुल की किसी भी सरकार ने सुध नहीं ली थी और पुल पर लगे लकड़ी के फट्टे सड़ चुके थे। जिससे कभी भी कोई हादसा पेश आ सकता था।
इस बारे में सरकार को कई बार प्रस्ताव पारित करके भेजे जा चुके हैं। किसी भी स्तर पर जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने हिम्मत जुटा के इस पुल की मरम्मत करके पैदल चलने योग्य बना दिया गया है।
उन्होने बताया कि डिम्मण क्षेत्र से अधिकांश बच्चें पुल को लांघ कर काॅलेज और स्कूल पहूंचते हैं। छोटे बच्चों को हाथ से पकड़कर पुल पार करवाते हैं।
उप प्रधान अनिल कुमार, जगदीश चैहान सहित अनेक लोगों ने सरकार से इस पुल को पक्का करने की पुनः मांग दोहराई है। इनका कहना है कि पुल के दोनों ओर हल्के वाहनों के चलने योग्य सड़क बन चुकी है ।
बता दें कि पैरवी खड्ड से दूसरी ओर के समूचे क्षेत्र. को डिम्मण कहा जाता है, जिसमें करीब 20 गांव आते हैं। खडैल गांव के जगदीश चौहान, सहित अनेक लोगों ने बताया कि डिम्मण क्षेत्र से राजगढ़ आने के लिए सबसे पुराना रास्ता इस पुल के माध्यम से है। जिसके चलते स्थानीय पंचायत द्वारा करीब 40 साल पहले खड़ैल के नीचे पैदल चलने योग्य पुल बनाया गया था।

