कोविड महामारी में मोदी सरकार की मैनेजमेंट फेल, युवा पीढ़ी भी आ रही चपेट में: राजेंद्र राणा

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हमीरपुर, व्यूरो रिपोर्ट

सुजानपुर के विधायक व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया है कि पूरे देश में कोविड वैक्सीन की भारी किल्लत चल रही है लेकिन देशवासियों के लिए वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक जुटाने की बजाए मोदी सरकार विदेशों में वैक्सीन भेज कर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि निखारने में लगी रही, जिसका खामियाजा देश की जनता भुगत रही है।

आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि मोदी सरकार 1 मई से 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने की बड़े जोर शोर से घोषणा की थी लेकिन लेकिन यह घोषणा जुमला ही साबित हुई है। राजेंद्र राणा ने कहा कि आज बड़ी संख्या में नौजवान भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर अपनी जानें गंवा रहे हैं और अस्पतालों में ना ऑक्सीजन मिल पा रही है और ना ही बेड मिल पा रहे हैं। लोग सड़क पर ही दम तोड़ रहे हैं।

राणा ने कहा कि अगर मोदी सरकार ने वैक्सीन का स्टॉक विदेशों में नहीं भेजा होता और देश में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत की होती तो आज देशवासियों के सामने इस तरह जिंदगी का संकट खड़ा नहीं होता। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी देशवासियों की जान की रक्षा करने की बजाय संकट की इस घड़ी में भी मोदी सरकार सिर्फ जुमलेबाजी में लगी रही और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने को प्राथमिकता देती रही।

राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है और 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग वैक्सीन लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि ऐसे लाखों लोगों को वैक्सीन कब लगेगी।

राणा ने कहा कि संकट की इस घड़ी में विपक्ष भी पूरी तरह से सरकार को मदद देने के लिए तैयार है लेकिन सरकार को कोई ठोस कार्य नीति बनानी चाहिए और राज्य के सभी छोटे से बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध करवाकर युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर की कि सरकार का टीकाकरण अभियान अभी तक कछुआ रफ्तार से चल रहा है और संक्रमण से जान गंवाने वालों की तादाद रोज बढ़ती जा रही है। कोविड सैंटरो में भी पर्याप्त व्यवस्था ना होने से मरीज परेशान हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस बीमारी का एकमात्र इलाज टीकाकरण ही है जिसके लिए लोग हांफते फिर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि सरकार अपनी ही घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने में नाकाम साबित हो रही है और सरकार की घोषणा सिर्फ हवा हवाई बनकर रह जा रही है।

राणा ने कहा कि इससे पहले भी कई संक्रामक बीमारियां समय पर दस्तक देती रही हैं लेकिन तत्कालीन सरकारों ने अपनी इच्छाशक्ति और ठोस कार्ययोजना के साथ बीमारियों पर काबू पाने में सफलता भी हासिल की है। लेकिन पहली बार ऐसा लग रहा है कि सरकार की न तो नीति स्पष्ट हो पा रही है और ना ही नियत स्पष्ट हो पा रही है।

उन्होंने कहा आज पूरी दुनिया के सामने भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं का जनाजा निकल गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के नेतृत्व की फजीहत हो रही है।

 

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