कालाअंब में शराब का काला किला ध्वस्त: रात डेढ़ बजे छापा, फर्जी लेबर से चल रही थी प्रोडक्शन, शराब की 230 पेटियां सीज

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे 

हिमाचल प्रदेश के राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में चल रही एक अवैध शराब फैक्टरी का भंडाफोड़ किया है। 4-5 की आधी रात को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।

उत्तराखंड के लिए बिना अनुमति बनाई जा रही शराब की इस फैक्ट्री में बॉटलिंग के साथ-साथ फर्जी मजदूरों की भी संलिप्तता सामने आई है।

अतिरिक्त आयुक्त उज्जवल राणा के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे त्रिलोक सन्स ब्रेवरी एंड डिस्टलरी पर छापा मारा।

एडिशनल कमिश्नर राणा ने नाहन में प्रेस को बताया की फैक्टरी में न तो बॉटलिंग की परमिशन थी और न ही लेबर अधिकृत थी। यह पूरी यूनिट अवैध रूप से ऑपरेट हो रही थी।

टीम जब मौके पर पहुंची, तो अवैध शराब का उत्पादन जारी था। रॉयल ब्लू’ ब्रांड की बोतलों पर ‘फॉर सेल इन उत्तराखंड’ के लेबल लगे हुए थे।

विभागीय जांच में पता चला कि यह शराब उत्तराखंड के नाम पर बनाई जा रही थी, लेकिन इसके लिए वैध अनुमति नहीं थी। डी-7 रजिस्टर से मजदूरों का सत्यापन करने पर यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सभी मजदूर फर्जी थे और चंडीगढ़ से लाए गए थे।

विभाग ने मौके से ‘रॉयल ब्लू’ की 230 पेटियां, एक ड्राई जिन (रुद्रपुर ब्रांड), करीब 3.95 लाख लेबल, 42,000 संतरा ब्रांड के लेबल, 2100 देसी और 1100 अंग्रेजी शराब के फालतू केस, 41,000 प्लास्टिक पेट बॉटल्स और 20 से 22 हजार चंडीगढ़ एक्साइज कैप्स जब्त किए।

मौके पर करीब 4500 बल्क लीटर अतिरिक्त ईएनए (ENA) भी पाया, जिसे तुरंत सीज कर दिया गया। हिमाचल में प्लास्टिक बॉटल्स में शराब की अनुमति नहीं है, इसलिए उन्हें भी जब्त किया गया है।

राणा ने कहा कि अब विभाग पूरे नेटवर्क की तह तक जाएगा, अतिरिक्त ईएनए की सप्लाई कहां से हुई, किन गाड़ियों से माल लाया गया और बनी हुई शराब किन स्थानों पर भेजी गई, यह सब जांच में सामने आएगा।

उपायुक्त हिमांशु आर. पंवार द्वारा इस मामले में पुलिस को लिखित शिकायत दी गई है। छापे में पुलिस विभाग ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

अब यह साफ हो गया है कि सिरमौर में शराब का अवैध कारोबार किस तरह संगठित रूप से चलाया जा रहा था, और आने वाले दिनों में इसकी परतें और खुल सकती हैं।

गौरतलब यह है कि यह डिस्टलरी हिमाचल प्रदेश की सबसे पुरानी शराब इकाइयों में से एक है। यह पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है।

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