
धर्मशाला-राजीव जस्वाल
हिमाचल विधानसभा का शीत सत्र शुक्रवार से धर्मशाला के तपोवन में सुबह 11:00 बजे शुरू हो गया। पहले दिन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा के तीन पूर्व सदस्यों बोध राज, गुरमुख सिंह बाली व डॉ. शिव कुमार के लिए शोकोद्गार प्रस्ताव रखा। इसके अलावा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत व लांस नायक विवेक कुमार को श्रद्धांजलि दी।
कांग्रेस विधायकों का अविश्वास प्रस्ताव खारिज
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के सात विधायकों ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार ने अपना विश्वास खो दिया है। उपचुनाव में भाजपा चारों सीटों पर हार गई। सदन में प्रस्ताव पेश होते ही खारिज कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने नियमों का हवाला देकर चर्चा की अनुमति नहीं दी।
विपिन परमार ने कहा कि नियमानुसार कांग्रेस के 23 सदस्य सदन में होने चाहिए। इस नियम का हवाला देकर प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया। कांग्रेस के 23 में से 18 सदस्य सदन में थे। कांग्रेस विधायकों ने सदन में चर्चा क्यों नहीं होती के नारे लगाना शुरू कर दिए।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का कहना था कि सरकार में प्रदेश की जनता का विश्वास नहीं रह गया है। सत्तारूढ़ भाजपा सरकार चारों उपचुनाव हारी है, ऐसे में भाजपा को सरकार में बने रहने का अधिकार नहीं रह गया है। होना तो यह चाहिए था कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को स्वयं त्यागपत्र देना चाहिए था।
प्रदेश में अराजकता फैली हुई है। महंगाई से प्रदेश की जनता त्रस्त है। पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। कांग्रेस सदस्य सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे और अंत में अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी शुरू की और विधानसभा से वाक आउट किया।
इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सदन को बताया कि सुबह मुकेश अग्निहोत्री, रामलाल ठाकुर, जगत सिंह नेगी, मोहनलाल ब्राक्टा की ओर से नियम 278 के तहत अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए सदन के एक तिहाई सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है।
लेकिन विपक्षी कांग्रेस के पास 18 सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं और अविश्वास प्रस्ताव के लिए 23 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने अविश्वास प्रस्ताव को पर्याप्त बहुमत न होने के कारण अस्वीकार किया।
जब अविश्वास प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष अपनी व्यवस्था दे रहे थे। मुकेश अग्निहोत्री सरकार पर आरोप लगाते जा रहे थे, इस बीच सभी कांग्रेस सदस्य भी सीटों से खड़े हो गए, कुछ देर बाद कांग्रेस सदस्यों की ओर से विरोध स्वरूप नारेबाजी भी की गई।
शोर-शराबे के बीच में विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सदन की कार्यवाही भोजन अवकाश तक के लिए घोषित की। सत्ता पक्ष के पिछली कतार में बैठे सदस्य जोर से बोल रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज भी कुछ कहना चाहते थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि पहले मुकेश अग्निहोत्री को कहने दें।
