3.43 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट धड़ाम, चंगर क्षेत्र में जलाड़ी-खरठ ब्रिज ने खोली लोक निर्माण विभाग की पोल.
हिमखबर – निजी संवाददाता
चंगर की करीब एक दर्जन पंचायतों को जोडऩे वाला निर्माणाधीन पुल सोमवार शाम ध्वस्त हो गया है। आधुनिक इंजीनियरिंग का उम्दा उदाहरण जलाड़ी-खरठ पुल बरसात से पहले धड़ाम हो जाने से लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
चंगर क्षेत्र की 15 पंचायतों को आपस में जोडऩे की तैयारी करता जलाड़ी का निर्माणाधीन पुल उद्घाटन से पहले ही ध्वस्त हो गया है। इससे चंगर क्षेत्र की उन उम्मीदों को झटका लगा है, जो दौलतपुर में मुख्य धारा से जुडऩे का सपना देख रही थीं।
लोगों का कहना है कि पुलों के निर्माण के वक्त लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारियां तय होती हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। अधिकारी कुर्सियां तोड़ रहे हैं और पुल ध्वस्त हो रहे हैं। यही नहीं, लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारी मीडिया का फोन सुनने में भी गुरेज करते हैं ।
लोगों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसा जाए, ताकि करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट ध्वस्त न हो ।
उल्लेखनीय है कि इस पुल के न होने की वजह से करीब एक दर्जन पंचायतों के लोगों को पांच किलोमीटर का सफर 20 किलोमीटर में तय करना पड़ता है। पिछले कई वर्षों से इस पुल की बनने की राह देख रहे ग्रामीणों में निराशा हाथ लगी है।
विधायक पवन काजल ने बताया कि पुल के निर्माण के वक्त जो भी अधिकारी कार्यरत रहे उन पर कार्रवाई हो और ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाए।
लोक निर्माण विभाग के एक्सियन सुशील डडवाल ने बताया कि पुल का आर्च गिरने की सूचना मिली है। मौके पर जाकर जांच के बाद ही पता लगेगा कि क्या कारण रहे होंगे। एसडीओ को मौके पर भेजा है। रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी
3.43 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट धड़ाम
ग्रामीणों ने पुल ध्वस्त होने से इसकी जांच के साथ मौजूदा अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है। पुल का शिलान्यास 9 अगस्त, 2017 को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह ने किया था। इस की अनुमानित लागत तीन करोड़ 43 लाख निर्धारित थी। ये पुल निर्माणाधीन था जिसका 30 से 40 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ था। इस दुर्घटना में किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ है।

