
कांगड़ा – राजीव जसवाल
आज हिमाचल प्रदेश के हर जिला में आवारा पशुओं के हमले से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कितने ही लोग इन्हीं आवारा पशुओं के अचानक हमले से गम्भीर रूप से घायल हुए हैं, परंतु इस बात पर अभी तक कोई भी कार्यवाही प्रदेश सराकार व प्रशासन द्वारा अम्ल में नहीं लाई गयी।
बात करें कांगड़ा शहर की तो आजकल सड़कों पर आवारा पशुओं का इतना आतंक मचा हुआ है कि राहगीरों एवं वाहन चालकों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।
तहसील चौंक पर सड़क किनारे लगी फल सब्जी के दुकान मालिकों द्वारा रोजाना शाम होते ही सड़े गले अथवा बचे हुए फल सब्जियों को सड़क किनारे ही फैंक दिया जाता है। जिस कारण वहां आवारा पशुओं का हुजूम लग जाता है।
कई बार ये आवारा पशु आपस में लड़ते हैं और आए दिन इन्हीं आवारा पशुओं की वजह से सड़कों पर हादसे होते रहते हैं। बीते शनिवार को कांगड़ा शहर के नागरिक अस्पताल के पास नैशनल हाईवे 88 पर आवारा पशुओं के अचानक हमले से पांच लोग घायल हो गए थे।
जिनमे से 3 जोकि गम्भीर रूप से घायल हुए थे। उनको आपातकालीन परिस्थिति में टांडा अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया था। इतने हादसे होने के बावजूद भी प्रशासन अपनी अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। ऐसा लगता है कि मानो प्रशासन इन आवारा पशुओं द्वारा कोई बड़ा हादसा होने के इंतजार में है।
लगातार खबरें लगने के बाद एवं कांगड़ा में इतने हादसे होने के बाद भी अभी तक प्रशासन एवं नगर परिषद कांगड़ा की तरफ से कोई भी कार्यवाही अम्ल में नहीं लाई गयी है। जब भी कभी वाहन चालक नियमो की अवहेलना करते हैं तो प्रशासन सीसी टीवी फुटेज के माध्यम से चालान काट देता है लेकिन उन्हीं वाहन चालकों की सुविधा के लिए सड़कों से बेसहारा पशुओं द्वारा अचानक हमले से निजात दिलाने के लिए अब तक कोई भी नेता, राजनीतिक कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी आगे नहीं आए हैं।
पिछले कल कांगड़ा कॉलेज में पड़ रही एक छात्रा को भी आवारा पशुओं ने तहसील चौंक पर अचानक हमला कर घायल कर दिया। परंतु स्थानीय दुकानदारों की मदद से लड़की को मौके पर स्थानीय नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। ये आवारा पशु कभी भी सड़क के बीचो बीच खड़े हो जाते हैं। जिससे अक्सर ट्रेफिक जाम भी लग जाता है।
आजकल कांगड़ा तहसील चौंक से लेकर दोमेला चौंक तक इन्हीं बेसहारा पशुओं के कारण वाहनों की लम्बी कतारें लगना आम बात हो गई है। जिससे कि वाहन चालकों एवं राहगीरों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इतने हादसे होने के बाद भी प्रशासन गहरी नींद में सोया है।
अब तो यही उम्मीद है कि इन आवारा पशुओं के अचानक हमले से प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी, किसी राजनेता अथवा किसी राजनीति कार्यकर्ता के घायल होने या कोई बड़ा हादसा होने पर ही प्रशासन की नींद खुलेगी।
कांगड़ा की जनता इन आवारा पशुओं के कारण बेहद परेशान है, शहर में अब लोग पैदल चलने से भी डरते हैं कि कहीं वे इन बेसहारा पशुओं के अचानक हमले का शिकार ना हो जाएं।
