
कांगड़ा – हिम खबर डेस्क
विपरीत परिस्थितियों के कारण मुश्किलें झेल रहे बच्चों का भविष्य संभाल रहे चाइल्ड लाइन कर्मी खुद शोषण का शिकार हो रहे हैं।
जिला कांगड़ा के आठ चाइल्ड लाइन कर्मियों को पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं मिला है। इससे अब इनको परिवार पालना भी मुश्किल हो गया है।
चाइल्ड लाइन धर्मशाला की टीम ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लंबित वेतन का भुगतान करने का आग्रह किया है।
चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने बताया कि चाइल्ड लाइन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित रात दिन चलने वाली निशुल्क आपातकालीन राष्ट्रीय फोन सेवा है। जो कि 0-18 साल के बच्चों के लिए काम करती है।
इसमें चाइल्ड लाइन टीम अनाथ, बेघर, गुमशुदा, यौन उत्पीड़न, बाल मजदूरी, बाल विवाह, भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चे, बीमार बच्चे, शोषित एवं मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित बच्चों के लिए काम करती है।
कांगड़ा जिले में चाइल्ड लाइन को फरवरी 2011 उत्थान संस्था द्वारा शुरू किया गया था। जिले में आठ सदस्यीय टीम काम कर रही है।
टीम के सदस्य मनमोहन, बलदेव सिंह, ललिता, डिंपल, पिंकू, जितेंद्र, इंदरजीत और सतीश 1098 के माध्यम से आने वाले मामलों का 24 घंटे के अंदर निपटारा करते हैं।
इसके साथ ही जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं। इन कर्मियों को जुलाई 2022 से वेतन नहीं मिला है।
टीम ने कहा कि एक तो महीने का वेतन 8000 है, वह भी समय पर नहीं मिलने से अपना घर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
चाइल्ड लाइन कांगड़ा टीम ने अब तक लगभग 200-250 बच्चों को जिले के विभिन्न बाल आश्रमों में रेस्क्यू करके पहुंचाया है।
इसके अलावा भी चाइल्ड लाइन ने पांच साल के बच्चों को जिन्हें लावारिस छोड़ दिया गया था। उन्हें भी आदेशानुसार शिमला स्थित शिशु गृह में पहुंचाया है।
चाइल्ड लाइन कांगड़ा में टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1098 के माध्यम से प्राप्त हुए लगभग 5,000 मामलों का टीम ने सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया है।
