
धर्मशाला – राजीव जसबाल
नशा आज युवाओं की रगों में इस कद्र जहर घोल रहा है कि इसकी चपेट में आए युवाओं के साथ-साथ उनके परिजनों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जमा दो कक्षा में मेधावी रहा एक छात्र अचानक नशे की गर्त में ऐसा धंसा की उसके गरीब पिता को जिलाधीश से मदद की गुहार लगाई पड़ी।
जानकारी के अनुसार जिला कांगड़ा के तहत एक गांव का 21 वर्षीय युवक नशे के दलदल में फंस गया। युवक निर्धन परिवार से संबंध रखता है।
युवक के पिता के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि बेटे को नशा मुक्ति केंद्र भेज सके। थकहार कर नशे के आदी हो चुके युवक का पिता सोमवार को जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल के दर पहुंचा।
उन्होंने अपनी व्यथा सुनाते हुए जिलाधीश से आर्थिक सहायता देने की गुहार लगाई। पीड़ित पिता का कहना है कि बेटा जमा दो कक्षा में प्रथम श्रेणी में पास हुआ है, लेकिन इसके बाद उसे नशे की लत लग गई।
अब वह नशे की हालत में घर में भी हुड़दंग मचाता है। नशे की लत छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया है, लेकिन नशा मुक्ति केंद्र में युवक के इलाज की फीस हजारों में बताई गई है।
नशा मुक्ति केंद्र के हजारों रुपये चुकाने में असमर्थता जताई।उसने बताया कि उसके गुर्दे की बीमारी का इलाज एक संस्था के माध्यम से हो रहा है।
उन्होंने जिलाधीश कांगड़ा से गुहार लगाई है कि या तो युवक को उस नशा मुक्ति केंद्र में भेजा जाए, जहां पर निशुल्क इलाज होता हो या फिर उसे जिस नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती किया गया है, वहां की फीस चुकाने के लिए आर्थिक सहायता मुहैया करवाई जाए।
जिलाधीश कांगड़ा ने जिला रेडक्राॅस सोसायटी को पीड़ित की उचित सहायता करने के निर्देश दिए हैं।
